अडानी समूह के आरोपों के चलते, नॉर्वे के सॉवरेन वेल्थ फंड ने निवेश वापस खींचा

Madhya Bharat Desk
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अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) को वित्तीय अपराधों से जुड़े कथित आरोपों और चिंताओं के कारण दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड, नॉर्वे के सरकारी पेंशन फंड (जिसका प्रबंधन नोर्गेस बैंक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट करता है), ने अपने पोर्टफोलियो (निवेश सूची) से बाहर करने का फैसला किया है।

बाहर करने का कारण

नोर्गेस बैंक ने अपनी वेबसाइट पर इस निर्णय की जानकारी देते हुए अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) को प्रतिबंधित कंपनियों की सूची में डाल दिया है। बैंक ने इसके लिए “घोर भ्रष्टाचार या अन्य गंभीर वित्तीय अपराध” के अस्वीकार्य जोखिम को मुख्य आधार बताया है, हालांकि इसकी कोई विस्तृत व्याख्या नहीं दी गई।

अडानी समूह की दूसरी कंपनी

यह अडानी समूह की दूसरी ऐसी कंपनी है जिसे नॉर्वे के इस फंड ने प्रतिबंधित किया है। इससे पहले मई 2024 में, फंड ने अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) को भी अपने पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया था। उस समय अडानी पोर्ट्स को बाहर करने का कारण युद्ध या संघर्ष की स्थितियों में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन में कथित तौर पर शामिल होने का जोखिम बताया गया था (विशेषकर म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद वहां के पोर्ट टर्मिनल से जुड़े व्यवसाय को लेकर)।

फंड की हिस्सेदारी

वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 के मध्य तक अडानी ग्रीन एनर्जी में नॉर्वे के इस वेल्थ फंड की करीब 0.23% की हिस्सेदारी थी, जिसका मूल्य लगभग 43.9 मिलियन डॉलर (करीब ₹400 करोड़) था। नियम के मुताबिक, किसी कंपनी को प्रतिबंधित करने के बाद फंड अपने शेयर बेच देता है और भविष्य में तब तक निवेश नहीं करता जब तक प्रतिबंध हटा न लिया जाए।

घरेलू म्यूचुअल फंड का रुख

जहां एक तरफ नॉर्वे का फंड अडानी ग्रीन से अपनी छोटी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकल रहा है, वहीं भारतीय घरेलू म्यूचुअल फंड्स ने 2025 की शुरुआत से अडानी ग्रीन के शेयरों में अपना निवेश 10 गुना तक बढ़ा दिया है (0.3% से बढ़ाकर 3% कर दिया है) और लगभग 500 मिलियन डॉलर के शेयर खरीदे हैं।

अन्य भारतीय कंपनियां भी हो चुकी हैं बाहर

नॉर्वे का यह फंड अपने सख्त नैतिक और पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों के लिए जाना जाता है। अतीत में इसने कोयला आधारित उत्पादन, पर्यावरणीय क्षति और अन्य आचरण संबंधी मानदंडों के कारण भारत की कई दिग्गज कंपनियों जैसे ONGC, कोल इंडिया, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), भेल (BHEL), गेल (GAIL), आईटीसी (ITC), लार्सन एंड टुब्रो (L&T), NHPC, NTPC और वेदांता लिमिटेड को भी अपनी निवेश सूची से बाहर किया हुआ है। अमेरिकी निवेशक वॉरेन बफेट की ‘बर्कशायर एनर्जी’ को भी इस फंड ने प्रतिबंधित किया है।

फिलहाल अडानी समूह की तरफ से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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