RSS बयान पर विवाद: दिग्विजय सिंह बोले– कांग्रेस एकजुट, फूट की कोशिश नाकाम

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली।आरएसएस की संगठनात्मक क्षमता को लेकर दिए गए बयान के बाद उठे सियासी विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और पार्टी के भीतर किसी भी तरह की वैचारिक या पारिवारिक फूट की बात निराधार है।

दरअसल, पार्टी कार्य समिति (CWC) की बैठक से पहले दिग्विजय सिंह द्वारा भाजपा और आरएसएस की संगठन शक्ति की सराहना किए जाने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई थी। इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और पार्टी दो खेमों में बंटी नजर आई। हालांकि, अब खुद दिग्विजय सिंह ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक ऐसा परिवार है, जिसने देश के लिए दो शहादतें दी हैं। नेहरू-गांधी परिवार के भीतर मतभेद दिखाने की भाजपा की कोशिशों की मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर कांग्रेस में फूट डालने का प्रयास कर रही है, जिसे कभी सफल नहीं होने दिया जाएगा।

दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेतृत्व संगठन को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने संगठनात्मक सुधार की प्रक्रिया जिला स्तर से शुरू की है, जो निचले स्तर तक लागू की जा रही है और यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी होगी।

सलमान खुर्शीद ने किया दिग्विजय सिंह का समर्थन

इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद दिग्विजय सिंह के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह सोचना भी गलत है कि दिग्विजय सिंह कोई ऐसा बयान देंगे, जो कांग्रेस पार्टी के हितों के खिलाफ हो। उन्होंने उन्हें पार्टी का मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि उनके शब्दों को सही संदर्भ और उद्देश्य के साथ समझा जाना चाहिए।

सलमान खुर्शीद ने कहा कि दिग्विजय सिंह का स्पष्ट मत है कि कांग्रेस का हर कदम देश को मजबूत करने और पार्टी को सशक्त बनाने की दिशा में होना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनुभवी नेताओं की अपनी राय और रणनीतिक दृष्टिकोण होता है, जिसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मान मिलना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी नेता की विचारधारा या बयान के आधार पर उसकी छवि और भूमिका पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। लोकतंत्र में संवाद बेहद जरूरी है और बिना संवाद के आगे बढ़ना संभव नहीं है।

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