वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतों के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर दी गई छूट की अवधि को बढ़ाकर 16 मई तक कर दिया है। इस फैसले से भारत को आने वाले कुछ हफ्तों तक सस्ते कच्चे तेल की सप्लाई बनाए रखने में मदद मिलेगी।
दरअसल, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने नया लाइसेंस जारी करते हुए यह स्पष्ट किया है कि अब देश समुद्री रास्ते से रूसी तेल खरीद सकते हैं। पहले यह छूट 11 अप्रैल को खत्म हो गई थी, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई थी। अब अचानक इस फैसले को बढ़ाना एक बड़े नीति बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के रुख में आए बदलाव के रूप में।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। अमेरिका का यह कदम साफ तौर पर ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने और सप्लाई चेन को बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत के लिए यह छूट बेहद अहम है, क्योंकि भारत पहले ही रूस से बड़े स्तर पर कच्चा तेल खरीद रहा है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भरोसा जताया है कि आने वाले समय में रूस भारत को कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई और बढ़ाएगा।
आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर और साफ हो जाती है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च महीने में भारत ने रूस से करीब 5.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा, जो फरवरी के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। 2022 के बाद से भारत रूस के लिए एक बड़े ऊर्जा बाजार के रूप में उभरा है।
हालांकि, इस फैसले पर अमेरिका के भीतर ही विरोध देखने को मिल रहा है। कई सांसदों का मानना है कि इस तरह की छूट से रूस की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है, खासकर ऐसे समय में जब रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है।
फिलहाल, भारत के लिए यह फैसला राहत लेकर आया है। सस्ते तेल की उपलब्धता से न केवल महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।







