रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन के दावे झूठे है? यहां विष्णु देव साय सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रही है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि RERA चेयरमैन संजय शुक्ला पर गंभीर आरोपों पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से आए जांच के आदेश के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है और वह अब भी अपने पद पर कायम है।
छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (RERA) जैसे अहम संस्थान की जिम्मेदारी रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की होती है। लेकिन मौजूदा विवादों ने इस संस्था की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेश चंद्र गुप्ता ने इस पूरे मामले को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने 31 अक्टूबर 2025 को प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्री और सीबीआई निदेशक को भेजे पत्र में संजय शुक्ला के कार्यकाल और कथित भ्रष्टाचार का विस्तृत ब्यौरा दिया है।
संजय शुक्ला पर 300 करोड़ की अवैध संपत्ति का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संजय शुक्ला ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 300 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की है। साथ ही उन पर बड़े पैमाने पर घोटालों में संलिप्त रहने के आरोप भी लगाए गए हैं।
जमीन-जायदाद का बड़ा नेटवर्क
आरोप है कि संजय शुक्ला भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त भ्रष्ट अधिकारी है जिसने वन क्षेत्र में भी भ्रष्टाचार किया है और करोड़ों की जमीन का एक बड़ा नेटवर्क बना लिया है।
रिश्वत केस और CBI की कार्रवाई
नवा रायपुर स्थित श्री रावतपुरा मेडिकल कॉलेज को मान्यता दिलाने के नाम पर 55 लाख रुपये की रिश्वत मामले में भी संजय शुक्ला का नाम सामने आया है। इस मामले में सीबीआई पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
केंद्र के निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं
9 फरवरी 2026 को पीएमओ की ओर से इस मामले की जांच के लिए DoPT और केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
सबसे अहम सवाल यही है कि जब आरोप गंभीर हैं, CBI चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और केंद्र से निर्देश भी जारी हो चुके हैं, तो फिर भ्रष्ट अधिकारी संजय शुक्ला अब तक अपने पद पर क्यों बने हुए हैं?
आरोप है कि सुशासन का दावा करने वाला विष्णु देव सरकार “भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण” दे रही है, जिसके कारण ऐसे अधिकारी अपने पद पर अभी भी बने हुए है और जनता का हक मारने में लगे हुए है।



