छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, 3 आरोपी गिरफ्तार

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं के कारोबार का एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रायपुर पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर इस अवैध नेटवर्क से जुड़े हुए थे।

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का तार मध्यप्रदेश के इंदौर से जुड़ा हुआ है, जहां से नकली दवाओं की सप्लाई की जा रही थी। गिरफ्तार आरोपियों में इंदौर का सप्लायर, साथ ही सारंगढ़ और भाठापारा के दो मेडिकल स्टोर संचालक शामिल हैं। सभी को सोमवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

 कैसे हुआ खुलासा?

इस पूरे मामले का पर्दाफाश तब हुआ, जब गोगांव इलाके में स्थित एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में नकली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी गई। शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि ये दवाएं बाहर से मंगाई गई थीं।

इसके बाद ड्रग विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए सारंगढ़ और भाठापारा के कई मेडिकल स्टोर्स पर छापेमारी की, जहां से इस नेटवर्क के और सुराग मिले।

 वायरल वीडियो से बढ़ा मामला

मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया, जब जनवरी महीने में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें सारंगढ़ के एक मेडिकल स्टोर संचालक को रायपुर में सहायक औषधि नियंत्रक संजय कुमार नेताम से एक रेस्टोरेंट में मुलाकात करते हुए देखा गया। वीडियो में फाइलों को लेकर संदिग्ध गतिविधियां भी नजर आईं।

इस घटना के बाद संजय कुमार नेताम को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

 कौन-कौन हुए गिरफ्तार?

जांच में सामने आया कि नकली दवाओं को इंदौर से मंगाकर स्थानीय दुकानों के जरिए बाजार में बेचा जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में

  • रोचक अग्रवाल (इंदौर – सप्लायर)
  • खेमराम बानी (सारंगढ़ – मेडिकल स्टोर संचालक)
  • सुरेंद्र कुमार (भाठापारा – मेडिकल स्टोर संचालक)

को गिरफ्तार किया है।

 स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि नकली दवाओं का यह कारोबार सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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