अनिल दुबे का आह्वान: जनगणना में ‘छत्तीसगढ़ी’ ही लिखें

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

छत्तीसगढ़ में अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक नया जनआंदोलन आकार लेता दिखाई दे रहा है। राज्य आंदोलनकारी अनिल दुबे ने जनगणना 2026 में छत्तीसगढ़ी को मातृभाषा के रूप में दर्ज कराने के लिए लोगों से आगे आने की अपील की है।

अनिल दुबे का कहना है कि देश के अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ के लोगों को भी अपनी मातृभाषा पर गर्व करते हुए उसे आधिकारिक रूप से दर्ज कराना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गुजरात में लोग गुजराती, महाराष्ट्र में मराठी, ओडिशा में उड़िया और पश्चिम बंगाल में बंगाली को अपनी मातृभाषा के रूप में दर्ज कराते हैं, जिससे उनकी भाषाई पहचान मजबूत होती है।

इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी “छत्तीसगढ़ी हमर मातृभाषा” के नारे के साथ एक जनजागरण अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य है कि हर नागरिक जनगणना के दौरान अपनी मातृभाषा के रूप में छत्तीसगढ़ी को ही दर्ज कराए।

राजधानी रायपुर के हांडीपारा स्थित छत्तीसगढ़ी भवन से जुड़े कार्यालय सचिव श्यामू राम सेन ने भी इस पहल को समर्थन देते हुए कहा कि यह केवल भाषा का मुद्दा नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान और स्वाभिमान से जुड़ा आंदोलन है। उन्होंने अपील की कि छत्तीसगढ़ी को केवल बोलचाल तक सीमित न रखकर इसे सरकारी कामकाज की भाषा बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जाएं।

यह आंदोलन धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है, जिसमें युवाओं, सामाजिक संगठनों और भाषा प्रेमियों की भागीदारी बढ़ रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति और नीतिगत फैसलों में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment