नक्सलवाद पर ‘क्रेडिट वॉर’: अमित शाह के बयान से सियासी पारा हाई

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली: लोकसभा में नक्सलवाद को लेकर हुई चर्चा अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद विपक्ष, खासकर कांग्रेस, ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

सोमवार को सदन में बोलते हुए अमित शाह ने दावा किया कि देश में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है और “नक्सल-मुक्त भारत” मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की सख्त नीतियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते हालात में बड़ा बदलाव आया है।

हालांकि, कांग्रेस ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। कांग्रेस सांसद मानिकम टैगोर ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सुरक्षा बलों की मेहनत का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ असली लड़ाई सुरक्षाबलों ने लड़ी है, न कि किसी एक नेता या सरकार ने।

टैगोर ने यह भी कहा कि गृह मंत्री का भाषण उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं था, बल्कि वह एक राजनीतिक भाषण ज्यादा लग रहा था। उन्होंने कांग्रेस का बचाव करते हुए कहा कि पार्टी ने भी इस लड़ाई में अपने कई नेताओं को खोया है।

 सरकार vs विपक्ष: आरोप-प्रत्यारोप तेज

लोकसभा में जवाब देते हुए अमित शाह ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के दौरान नक्सलियों को संरक्षण मिला। उन्होंने राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि उसमें नक्सल समर्थक विचारधारा के लोग शामिल थे।

शाह ने यह भी कहा कि नक्सलवाद की जड़ गरीबी नहीं, बल्कि एक विचारधारा है, जिसे देश के खिलाफ इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में हजारों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, कई गिरफ्तार हुए और बड़ी संख्या में मुठभेड़ों में मारे गए।

 राहुल गांधी पर भी निशाना

अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी कई मौकों पर नक्सली विचारधारा से जुड़े लोगों के संपर्क में रहे हैं, यहां तक कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी ऐसे तत्वों की भागीदारी रही।

इन आरोपों पर विपक्षी सांसदों ने सदन में हंगामा किया।

 कांग्रेस का पलटवार: ‘लोकतंत्र में एकतरफा आवाज नहीं चलेगी’

अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मणिकम टैगोर ने सवाल उठाया कि क्या संसद अब सिर्फ एकतरफा बयानबाजी का मंच बनती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया जा रहा।

टैगोर ने कहा, “संसद चर्चा के लिए है, न कि एकतरफा प्रोपेगैंडा के लिए। अगर सरकार अपने दावों को लेकर इतनी ही आश्वस्त है, तो उसे विपक्ष की बात सुनने से डर क्यों लगता है?”

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