नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में 4 मई को वोटों की गिनती होनी है, लेकिन उससे पहले ही माहौल काफी गरम हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बेचैनी साफ दिख रही है। उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस हर तरफ से कोशिश कर रही है कि किसी तरह उन्हें राहत मिल जाए।
इसी वजह से ममता बनर्जी खुद कोलकाता के भवानीपुर इलाके में बने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर करीब 4 घंटे तक मौजूद रहीं। यहीं पर ईवीएम और वीवीपैट मशीनें रखी गई हैं। उनका वहां बैठना यह दिखाता है कि वह चुनाव के परिणाम को लेकर कितनी गंभीर है।
इस बीच टीएमसी फिर से कोलकाता हाई कोर्ट पहुंच गई। पार्टी का कहना है कि काउंटिंग में राज्य के अफसरों को शामिल नहीं करना गलत है। उनका आरोप है कि देश का चुनाव निर्वाचन आयोग सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों के जरिए गिनती करवा रहा है, जिससे असर पड़ सकता है।
लेकिन कोर्ट ने साफ कह दिया कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। चुनाव आयोग को पूरा हक है कि वह राज्य या केंद्र किसी भी कर्मचारी को काउंटिंग के लिए लगा सकता है।
अगर पिछले कुछ महीनों पर नजर डालें, तो यह पहली बार नहीं है। टीएमसी कई बार कोर्ट जा चुकी है, लेकिन हर बार उन्हें कोई खास राहत नहीं मिली।
चुनाव से पहले, वोटिंग के दौरान और अब काउंटिंग से पहले हर स्टेज पर याचिकाएं डाली गईं। लेकिन हर बार कोर्ट ने वही जवाब दिया कि इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है।
अब सवाल यह उठता है कि बार-बार कोर्ट जाने से क्या वाकई कुछ बदल जाएगा? क्योंकि स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर बैठने या कई याचिकाएं डालने से नतीजे नहीं बदलते, फैसला तो जनता के वोट से ही तय होता है।



