रायपुर।छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के दौरान सामने आए सरकारी गवाह चंद्राकर के बयान ने व्यवस्था की जड़ों को हिला दिया है। गवाह ने खुलासा किया है कि किस तरह आयोग के तत्कालीन शीर्ष अधिकारियों और रसूखदारों ने अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्तेदारों और करीबी लोगों को मोटी रकम के बदले नौकरी दिलाई।
50 से 60 लाख में तय होती थी नौकरी
गवाह के अनुसार वर्ष 2021-22 की CGPSC परीक्षा में चयन सुनिश्चित कराने के लिए उत्कर्ष चंद्राकर ने अपने मौसा, तत्कालीन OSD केके चंद्रवंशी और OSD चेतन बोघरिया की पहुंच का हवाला देते हुए अभ्यर्थियों से 50 से 60 लाख रुपये की डील तय करवाई थी।
मैरिज पैलेस में लीक हुआ प्री का पेपर
डील फाइनल होने के बाद परीक्षा से ठीक एक दिन पहले, 12 फरवरी 2022 को रायपुर स्थित सिद्धिविनायक मैरिज पैलेस में चयनित अभ्यर्थियों को छपे हुए प्रश्नपत्र दिए गए। पूरी रात सवाल रटवाए गए, जिसके बाद रितेश चंद्राकर, लोकेश चंद्राकर, समीर चंद्राकर, माधुरी साहू, प्रवीण कुमार प्रसाद, सत्येन्द्र सिंह ठाकुर, पुल्कीत साहू और भारती वर्मा सहित कई उम्मीदवार प्री परीक्षा में सफल घोषित कर दिए गए।
मेन्स के लिए बारनवापारा रिसॉर्ट बना अड्डा
प्री के बाद मेन्स परीक्षा की तैयारी के लिए पूरा खेल बारनवापारा स्थित एक रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया गया। यहां फर्जी नामों से कमरों की बुकिंग कराई गई और कड़ी निगरानी में अभ्यर्थियों को ठहराया गया। इस सूची में कई नए नाम भी जुड़े, जिनमें ऋचा कौर, ज्योति सूर्यवंशी, दिव्यानी तिवारी, योगेश देवांगन, कृति सिंह, मनीष, निकिता, प्रतीक, विनोद सिंह, निवेदिता राजपूत, शास्वत सोनी सहित अन्य शामिल थे।
शिक्षकों को भी बुलाया गया
पेपर हल कराने के लिए धर्मेन्द्र साहू और परितोष जैसे शिक्षकों को रिसॉर्ट बुलाया गया। चार्जशीट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने अपने बेटे, भतीजे, भांजी और बहुओं का चयन सुनिश्चित किया।
इसी तरह सचिव जीवन किशोर ध्रुव के बेटे, राज्यपाल सचिवालय से जुड़े लोगों के बच्चों और कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवारों के अभ्यर्थियों के चयन पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
CBI की सख्त कार्रवाई
CBI ने अब टामन सोनवानी, जीवन किशोर ध्रुव, उत्कर्ष चंद्राकर समेत कई नामजद आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में 29 अयोग्य अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया, जिससे हजारों मेहनती युवाओं के साथ अन्याय हुआ।
29 नहीं होते तो कौन बनता अधिकारी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर ये 29 अयोग्य उम्मीदवार प्री परीक्षा में पास नहीं होते, तो क्या कई योग्य अभ्यर्थी आज अधिकारी बन चुके होते? सूत्रों के मुताबिक, छात्र संगठनों द्वारा अब इस पूरे मामले की EOW जांच की मांग की तैयारी की जा रही है।
यह मामला प्रदेश के इतिहास के सबसे बड़े शिक्षा और भर्ती घोटालों में शामिल होता जा रहा है, जिसमें अब इंसाफ की उम्मीद CBI की चार्जशीट से बंधी है।







