रायपुर।छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक भर्ती 2023 से जुड़े डीएड (डीएलएड) अभ्यर्थियों का सब्र अब जवाब देने लगा है। न्यायालयीन आदेशों के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने से नाराज़ अभ्यर्थी 24 दिसंबर से नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर आमरण अनशन पर बैठे हैं। कड़ाके की ठंड के बीच जारी इस आंदोलन में अभ्यर्थियों की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, ठंड और लंबे अनशन के कारण कई अभ्यर्थी गंभीर रूप से बीमार हो चुके हैं। शनिवार को चार अभ्यर्थियों की हालत अचानक बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। अब तक कुल 135 अभ्यर्थियों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा चुका है।
स्वास्थ्य जांच पर उठे सवाल
अभ्यर्थियों का आरोप है कि धरना स्थल पर रात के समय स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई नियमित मेडिकल जांच नहीं की जा रही है, जिससे उनकी स्थिति और चिंताजनक हो रही है। लगातार मानसिक तनाव और शारीरिक कमजोरी आंदोलनकारियों की सेहत पर भारी पड़ रही है।
प्रशासन को चेतावनी
संयुक्त डीएड अभ्यर्थी संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि किसी भी अभ्यर्थी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है या स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचता है, तो इसकी नैतिक, प्रशासनिक और संवैधानिक जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
राजनीतिक समर्थन भी मिला
धरना स्थल पर जोगी पार्टी के नेता अमित जोगी भी अभ्यर्थियों के समर्थन में पहुंचे और उनकी मांगों को जायज बताया।
योग्य होने के बावजूद नियुक्ति से वंचित
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे सहायक शिक्षक भर्ती 2023 की सभी पात्रताओं पर खरे उतरते हैं, इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी जा रही है। कोर्ट के आदेश आने के बाद भी सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने से गहरा असंतोष व्याप्त है।
आश्वासन से थक चुके अभ्यर्थी
आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने बताया कि वे पहले भी कई बार ज्ञापन सौंप चुके हैं और प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। उनका कहना है कि वे किसी विशेष रियायत की नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकार की मांग कर रहे हैं।
डीएड अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और भेदभावपूर्ण रवैये के कारण सैकड़ों परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं।







