सरकार की नींद में मरीजों की सांसें! रायपुर AIIMS का खौफनाक राज!

Madhya Bharat Desk
4 Min Read

छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में डॉक्टरों की भयानक कमी से मरीज परेशान हैं। स्वीकृत 305 डॉक्टरों के पदों में से मात्र 190 पर ही डॉक्टर कार्यरत हैं, यानी 115 महत्वपूर्ण पद खाली पड़े सड़ रहे हैं। खासकर कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और सर्जरी जैसे जीवन रक्षक विभागों में डॉक्टरों की कमी से OPD में लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं, ऑपरेशन में महीनों की देरी हो रही है और गंभीर बीमारियों से जूझते मरीजों को बेड तक नहीं मिल रहे। दूसरी ओर, नर्स, तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ के 3884 स्वीकृत पदों में से 2387 पर ही लोग हैं, बाकी 1499 पद खाली हैं। इस भयावह स्थिति ने AIIMS को ‘डॉक्टरों का कब्रिस्तान’ बना दिया है, जहां मरीज इलाज के नाम पर सिर्फ इंतजार करते मरते हैं।

राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम ने राज्यसभा में इस घोर लापरवाही पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने जोरदार आवाज में कहा, “रायपुर AIIMS में डॉक्टरों और स्टाफ की भर्ती तुरंत की जाए, बेडों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि मरीजों को समय पर सही इलाज मिले।

” नेताम ने केंद्र की ‘तिरपाल गधे वाली सरकार’ को निशाना बनाते हुए खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा, “जब भी AIIMS रायपुर में फोन करते हैं तो जवाब आता है- ‘बेड खाली नहीं है’। मरीज इलाज के लिए तड़पते हैं, लेकिन सरकार गधे की गति से चल रही है। स्वीकृत पद खाली पड़े हैं, जो खुद सरकार के दस्तावेजों में दर्ज हैं, फिर भी भर्ती क्यों नहीं?”

यह स्थिति छत्तीसगढ़ के लाखों मरीजों के लिए अभिशाप बन चुकी है। OPD में सुबह से शाम तक हजारों लोग लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी से जांच-उपचार में देरी। कार्डियोलॉजी में हृदय रोगी बेड के इंतजार में दम तोड़ देते हैं, न्यूरोलॉजी में स्ट्रोक पीड़ित समय पर इलाज न मिलने से लकवा मार लेते हैं। सर्जरी विभाग में ऑपरेशन की वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी है कि छोटी बीमारी कैंसर बन जाती है। नर्सों की कमी से IV ड्रिप तक ठीक से नहीं लग पाती।

प्रशासनिक स्टाफ की कमी से फाइलें अटकी रहती हैं, मरीजों का रिकॉर्ड गुम हो जाता है। AIIMS, जो देश का शीर्ष चिकित्सा संस्थान होना चाहिए, अब ‘खाली कुर्सियों का संग्रहालय’ बन गया है।

सरकार की यह उदासीनता जानलेवा है। 2017 में शुरू हुए AIIMS रायपुर पर अरबों रुपये खर्च हो चुके, लेकिन भर्ती प्रक्रिया ‘कछुए की चाल’ से चल रही। सांसद नेताम ने मांग की है कि भर्ती परीक्षा तत्काल आयोजित हो, पद भरें जाएं और बेड क्षमता दोगुनी की जाए।

उन्होंने चेतावनी दी, “अगर सरकार नहीं चेती तो मरीज सड़कों पर उतरेंगे। यह स्वास्थ्य सेवा की हत्या है!” विपक्षी दलों ने भी समर्थन जताया, कहा कि केंद्र की ‘गधे वाली नींद’ से लाखों जानें खतरे में हैं।

क्या केंद्र सरकार इस ‘डॉक्टरों के संकट’ को हल करेगी या मरीजों को इसी तरह तड़पने देगी? यह सवाल हर नागरिक पूछ रहा है। AIIMS रायपुर की यह त्रासदी पूरे देश के लिए चेतावनी है- स्वास्थ्य सेवा को मजाक न बनाएं!

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment