लखनऊ से एक बड़ी कानूनी खबर सामने आई है, जहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने अदालत के सामने संबंधित रिकॉर्ड पेश किया, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से देखा। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को तय की है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले दिनों में यह मामला और महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है।
यह पूरा मामला एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने अपनी नागरिकता से संबंधित अहम तथ्यों को छिपाया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि राहुल गांधी ने यूनाइटेड किंगडम में “Backops Ltd.” नाम की एक कंपनी पंजीकृत कराई थी और उस कंपनी के दस्तावेजों में उन्होंने अपनी नागरिकता ‘ब्रिटिश’ बताई थी। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामे में विदेशी बैंक खातों और संपत्तियों का भी जिक्र किया गया था।


सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए और वर्ष 2019 में राहुल गांधी को भेजे गए नोटिस से संबंधित पूरा रिकॉर्ड पेश किया गया। कोर्ट ने इस मामले में भारत सरकार को भी औपचारिक रूप से पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
इसी दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह मांग भी उठाई गई कि रायबरेली के कोतवाली थाने में राहुल गांधी के खिलाफ धोखाधड़ी, पासपोर्ट अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। हालांकि इससे पहले लखनऊ की निचली अदालत इस मांग को खारिज कर चुकी है, लेकिन उसी फैसले को अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इतने गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस जांच आवश्यक है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकारी पक्ष को अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब 6 अप्रैल 2026 को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा या नहीं।



