75 देशों की नौसेनाएं एक मंच पर, INS विक्रांत पर गूंजा वैश्विक समुद्री एकता का संदेश

Madhya Bharat Desk
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विशाखापत्तनम। हिंद महासागर की लहरों पर इस सप्ताह वैश्विक ताकत और भरोसे की एक नई कहानी लिखी गई। बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन 2026 का 13वां संस्करण भव्य समापन के साथ संपन्न हो गया। इस बार 75 देशों की नौसेनाओं ने एक साथ समुद्र में अपनी रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया।

समापन समारोह भारत के स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर आयोजित किया गया, जहां भारतीय नौसेना प्रमुख सहित मित्र देशों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का मूल संदेश था — “भाईचारा, समन्वय और सहयोग” — जो आज की वैश्विक समुद्री चुनौतियों के दौर में बेहद प्रासंगिक है।

 दो चरणों में हुआ अभ्यास

19 से 25 फरवरी तक चले इस विशाल सैन्य अभ्यास को दो हिस्सों में बांटा गया था — हार्बर फेज और सी फेज।

बंदरगाह चरण के दौरान नौसैनिक विशेषज्ञों के बीच रणनीतिक चर्चाएं, युवा अधिकारियों के संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन गतिविधियों ने अलग-अलग देशों के नौसैनिकों के बीच भरोसा और पेशेवर तालमेल को मजबूत किया।

 समुद्र में शक्ति का प्रदर्शन

21 फरवरी से शुरू हुए समुद्री चरण में अभ्यास ने रफ्तार पकड़ी। इस दौरान 40 युद्धपोत और 29 विमान समुद्र में उतरे। इनमें 18 विदेशी युद्धपोत भी शामिल थे।

पूर्वी नौसेना कमान के तहत संचालित इस अभ्यास में वायु, सतह और पनडुब्बी रोधी अभियानों की गहन ड्रिल की गई। करीब 90 घंटे की उड़ान भरकर जटिल ऑपरेशनों का अभ्यास किया गया, जिसमें एंटी-सबमरीन वारफेयर और एयर डिफेंस जैसे मिशन शामिल थे।

यह अभ्यास केवल सैन्य प्रदर्शन नहीं था, बल्कि समुद्री सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक भी बना।

 1995 से 2026 तक का सफर

मिलन अभ्यास की शुरुआत 1995 में केवल चार देशों के साथ हुई थी। आज यह एक वैश्विक मंच बन चुका है, जहां दुनिया की 65 से अधिक नौसेनाएं जुड़ चुकी हैं।

इस संस्करण में यूनाइटेड स्टेट, रूस, फ्रांस और जापान सहित कई प्रमुख देशों ने भागीदारी की।

इसके साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र के 25 तटीय देशों के नौसेना प्रमुखों ने समुद्री डकैती, आपदा राहत और अवैध गतिविधियों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर चर्चा की।

भारत का बढ़ता समुद्री कद

मिलन 2026 ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि भारत केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वदेशी युद्धपोतों और उन्नत सैन्य क्षमताओं के साथ भारत ने अपने बढ़ते सामरिक प्रभाव का मजबूत संकेत दिया है।

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