छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से लेकर अब तक राज्य ने कई मुख्यमंत्रियों का नेतृत्व देखा है — अजित प्रमोद कुमार जोगी, डॉ. रमन सिंह और भूपेश बघेल। इन सभी के कार्यकाल में जनसुनवाई और मुलाकातों का एक तयशुदा समय रहा करता था।
हालांकि, वर्तमान में विष्णुदेव साय के कार्यकाल में एक अलग व्यवस्था को लेकर चर्चाएँ तेज हैं। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री रात 11 बजे से लेकर 2 बजे के बीच भी लोगों और विभिन्न प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं।
इस व्यवस्था को लेकर जनता के बीच दो तरह की राय उभरकर सामने आ रही है। एक वर्ग इसे मुख्यमंत्री की कार्यशैली और उपलब्धता के रूप में देख रहा है — उनका मानना है कि देर रात तक मिलना इस बात का संकेत है कि मुख्यमंत्री समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं।
वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग इसे अव्यवस्थित प्रशासनिक प्रणाली का संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि रात के समय न तो आसपास दुकानें खुली रहती हैं और न ही भोजनालय, ऐसे में दूर-दराज़ से आने वाले लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
कई नागरिकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह निर्णय स्वयं मुख्यमंत्री की प्राथमिकता है या फिर प्रशासनिक स्तर पर तय की गई कोई रणनीति? कुछ लोग यह भी चर्चा कर रहे हैं कि कहीं यह अधिकारियों की कोई चाल तो नहीं, जिससे मुख्यमंत्री की छवि प्रभावित हो।
हालांकि, इस विषय पर अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में स्पष्ट निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए पारदर्शिता और समय प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि देर रात मुलाकातें हो रही हैं, तो उसके पीछे के कारणों और व्यवस्था की स्पष्ट जानकारी जनता के सामने आनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांति या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।







