दशकों तक केरल की सत्ता पर काबिज ‘लाल ब्रिगेड’ ने जिस राज्य को अपनी विचारधारा की प्रयोगशाला बना रखा था, आज उसी केरल में उनकी सत्ता की नींव हिलती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनकी पार्टी वामपंथी विचारधारा ने हिंदू परंपराओं को कुचलने और ‘नास्तिकता’ को थोपने का प्रयास किया, आज उसी केरल की गलियों से कम्युनिस्टों के अंत का शंखनाद सुनाई दे रहा है। आंकड़ों और ज़मीनी हकीकत ने पिनाराई विजयन सरकार की रातों की नींद उड़ा दी है।
कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) ने जिस ‘हिंदू विरोधी’ एजेंडे को केरल का मॉडल बताया था, उसे राज्य की जनता ने पैरों तले रौंद दिया है।
सबरीमाला का सबक: भगवान अयप्पा के भक्तों पर लाठियां भांजने वाली सरकार आज बेबस है। प्रतिदिन80,000 से 1 लाखभक्तों का जनसैलाब यह गवाही दे रहा है कि कम्युनिस्टों का डंडा अब सनातन की आस्था के आगे टूट चुका है।
गुरुवायूर में रिकॉर्ड भीड़: श्रीकृष्ण के चरणों में उमड़ती यह भीड़ केवल दर्शन के लिए नहीं, बल्कि वामपंथी अधर्म के खिलाफ एक एकजुट ‘हिंदू वोट बैंक’ की आहट है।
मलप्पुरम का ‘महा-चमत्कार’ – 250 साल का इंतज़ार खत्म
जो मलप्पुरम कभी वामपंथियों और कट्टरपंथियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता था, वहां250 साल बाद ‘महामघ महोत्सव’ का सफल आयोजन कम्युनिस्टों के गाल पर सबसे बड़ा तमाचा है। दक्षिण भारत से उमड़े लाखों श्रद्धालुओं ने साफ कर दिया कि केरल अब कार्ल मार्क्स की किताबों से नहीं, बल्कि वेदों के ज्ञान से चलेगा।
संतों का शंखनाद: अब होगा ‘सोम यज्ञ’

केरल की धरती परजूना अखाड़े के महामंडलेश्वर आनंद चैतन्य भारती महाराज जी का आगमन वामपंथियों के ताबूत में आखिरी कील साबित होने वाला है। आगामी भव्य‘वैदिक सोम यज्ञ’ ने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है। वेदों की गूँज अब उस राज्य में सुनाई देगी जहाँ कभी ‘लाल सलाम’ के नारों से हिंदू समाज को डराने की कोशिश की जाती थी।
लेकिन केरल में अब हवा बदल चुकी है। जो लोग कहते थे कि केरल में हिंदुत्व के लिए जगह नहीं है, उन्हें मंदिरों की कतारों में खड़े इन लाखों नौजवानों को देखना चाहिए। यह साफ़ है कि कम्युनिस्टों के घर में अब ‘सनातन’ की अलख जल चुकी है, जिसे बुझाना अब नामुमकिन है।”







