महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी के बीच बढ़ते टकराव पर सरकार की निष्क्रियता अब सवालों के घेरे में है।
भाजपा, जो खुद को राष्ट्रवादी पार्टी बताती है, अगर समय रहते इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाती, तो ये क्षेत्रीय अस्मिता बनाम राष्ट्रभाषा की जंग पूरे देश में आग की तरह फैल सकती है।
भविष्य का खतरा:
- दक्षिण भारत पहले से ही हिंदी थोपने के खिलाफ मुखर है।
- पूर्वोत्तर और पंजाब जैसे राज्यों में भाषाई पहचान बेहद संवेदनशील मुद्दा है।
अगर भाजपा ने संतुलन नहीं साधा, तो राष्ट्रव्यापी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
महाराष्ट्र में उठी यह चिंगारी अगर भाजपा ने समय रहते नहीं बुझाई, तो यह पूरे देश में एक आग बन सकती है — जो भाषा, अस्मिता और पहचान की राजनीति को नए मोड़ पर ले जाएगी।







