ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते के पीछे महीनों तक चली बैकडोर डिप्लोमेसी अहम रही। सितंबर 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर वॉशिंगटन गए थे, जहां उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी।
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी 2026 को घोषणा की कि दोनों देश एक बड़े व्यापार समझौते पर सहमत हो गए हैं। इसके तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को 25–50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर कम टैरिफ से भारत–अमेरिका आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी।
ट्रंप ने यह दावा भी किया कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा और अमेरिका से अधिक ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा। हालांकि भारत सरकार ने फिलहाल केवल टैरिफ कट की पुष्टि की है। रूसी तेल को लेकर किसी तरह की औपचारिक प्रतिबद्धता पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
रिपोर्ट के अनुसार वॉशिंगटन बैठक में अजीत डोभाल ने स्पष्ट संदेश दिया था कि भारत अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो भारत ट्रंप के पूरे कार्यकाल तक इंतजार करने को तैयार है, बशर्ते सार्वजनिक आलोचना और आक्रामक बयानबाजी रोकी जाए।
इस ट्रेड डील को भारत की सधी हुई कूटनीति और आत्मसम्मान आधारित विदेश नीति के रूप में देखा जा रहा है।







