नई दिल्ली।ईरान में महंगाई के खिलाफ पिछले दो हफ्तों से जारी जन आंदोलन अब गंभीर हिंसा में तब्दील हो चुका है। सरकार की सख्त चेतावनियों के बावजूद प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे हुए हैं। राजधानी तेहरान समेत देश के 100 से अधिक शहरों में हिंसक झड़पें, फायरिंग, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं।
अमेरिका स्थित संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष में अब तक 538 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 48 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। वहीं ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने 109 सुरक्षाकर्मियों की मौत की पुष्टि की है। केवल इस्फहान क्षेत्र में ही 30 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की खबर है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों के हताहतों के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।
अब तक 10,670 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
अंतरराष्ट्रीय नजरें ईरान पर
ईरान में बिगड़ते हालात पर अमेरिका कड़ी निगरानी रखे हुए है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे ईरानी नागरिकों के समर्थन के लिए तैयार है। वहीं ईरान सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने हमला किया तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल पर जवाबी कार्रवाई करेगा। इस चेतावनी के बाद इजरायल ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है।
यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सला वान डेर लिएन ने भी ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दिया है।
सरकार का सख्त रुख
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से बातचीत को तैयार है, लेकिन हिंसा फैलाने वालों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने देश में अशांति के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है।
प्रोसीक्यूटर जनरल मुहम्मद मुवाहेदी आजाद ने न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तोड़फोड़ और आगजनी के मामलों में गिरफ्तार लोगों पर मुकदमों की सुनवाई तेज की जाए। उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल लोग “अल्लाह के दुश्मन” हैं और ऐसे अपराधों के लिए संविधान में मृत्युदंड का प्रावधान है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी है कि वे हिंसा और अराजकता से दूर रहें, जबकि सेना ने संकेत दिया है कि हालात बिगड़ने पर वह राष्ट्रीय हितों के अनुरूप कदम उठाएगी।
रजा पहलवी की वापसी की सुगबुगाहट
ईरान के अपदस्थ शाह के बेटे और पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने दावा किया है कि ईरान की कट्टरपंथी इस्लामिक सत्ता अपने अंतिम दौर में है। उन्होंने कहा कि बीते 46 वर्षों से जनता इस शासन से त्रस्त है और अब धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था चाहती है।
अमेरिका में रह रहे रजा पहलवी ने ईरान लौटने की तैयारी की बात कही है। कई शहरों में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान शाह की वापसी की मांग वाले पोस्टर भी नजर आ रहे हैं। वहीं सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ तेहरान समेत कई शहरों में नारेबाजी तेज हो गई है।
गौरतलब है कि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद शाह रजा पहलवी को सत्ता से हटाकर अयातुल्ला खोमेनी ने ईरान की कमान संभाली थी। खोमेनी के निधन के बाद से अली खामेनेई देश के सर्वोच्च नेता हैं।







