रायपुर: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी शुरू हुए 10 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन खरीदी की गति अब तक सामान्य नहीं हो पाई है। समितियों के कर्मचारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की हड़ताल खत्म होने के एक सप्ताह बाद भी, धान खरीदी केंद्रों पर किसानों को टोकन प्राप्त करने और अपना धान बेचने के लिए लगातार जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
इस धीमी रफ्तार और अव्यवस्था ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जिस पर प्रदेश के किसान संगठनों और विपक्षी कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सरकार की नाकामी के चलते, पिछले वर्ष की तुलना में चालू धान खरीदी वर्ष में 1,29,000 किसान कम पंजीकृत हुए हैं और पिछली साल की तुलना में 5,00,000 हेक्टेयर रकबा काट दिया गया है।
सरकार की नीयत में खोट
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन, दुर्ग के अध्यक्ष आई.के. वर्मा और संयोजक एड. राजकुमार गुप्त ने धान खरीदी की वर्तमान स्थिति पर कड़ा आक्रोश व्यक्त जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी में सरकार की “नीयत में खोट” है और किसानों को परेशान करने की यह एक सोची समझी रणनीति है। उन्होंने कहा कि पहले धान उत्पादक किसानों को खाद (यूरिया और डीएपी) के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। जानबूझकर समितियों में खाद समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया, ताकि किसान हतोत्साहित होकर कम रकबे में धान की बोवाई करें। अब टोकन नहीं मिल रहा है। किसानों को लगातार परेशानी हो रही है।
21 क्विंटल खरीदी से बचने का षड्यंत्र: कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा सरकार अपने वादे के अनुसार 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदना नहीं चाहती है, इसीलिए धान खरीदी में व्यवधान उत्पन्न करने के लिए “नया-नया षड्यंत्र रचा जा रहा है” और किसानों को परेशान किया जा रहा है। किसानों की संख्या में कमी और रकबा घटना सीधा-सीधा किसानों को नुकसान पहुंचाने रचा गया षड्यंत्र है।







