छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि को लेकर निजी स्कूलों और राज्य सरकार के बीच तनातनी बढ़ती दिख रही है। प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पत्र लिखकर वर्तमान प्रतिपूर्ति दरों को अपर्याप्त बताते हुए उसमें उल्लेखनीय वृद्धि की मांग की है।
एसोसिएशन का कहना है कि बढ़ती महंगाई, शिक्षकों के वेतन, बुनियादी ढांचे और अन्य संचालन खर्चों को देखते हुए वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि स्कूलों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है।
हाईकोर्ट के आदेश का हवाला
संगठन ने अपने पत्र में बिलासपुर हाईकोर्ट के उस आदेश का उल्लेख किया है, जिसमें राज्य सरकार को छह माह के भीतर प्रतिपूर्ति दरों पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। एसोसिएशन का आरोप है कि निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
कितनी बढ़ोतरी की मांग?
एसोसिएशन ने प्रतिपूर्ति राशि में निम्नलिखित संशोधन की मांग की है—
- प्राथमिक कक्षाएं: ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000
- माध्यमिक स्तर: ₹11,500 से बढ़ाकर ₹22,000
- हाई एवं हायर सेकेंडरी: ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000
इसके साथ ही संगठन ने यह भी मांग रखी है कि संशोधित दरें पिछले तीन वर्षों से प्रभावी मानी जाएं और लंबित बकाया राशि का भुगतान किया जाए।
आंदोलन की चेतावनी
प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो वे असहयोग आंदोलन शुरू करने पर मजबूर होंगे। ऐसी स्थिति में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और हजारों विद्यार्थियों पर इसका असर पड़ सकता है।
अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है — समझौते का रास्ता या टकराव की स्थिति।







