मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पंचायत सचिव भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए नए नियमों का प्रारूप जारी किया गया है। इस प्रारूप में कई अहम बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिनका सीधा प्रभाव प्रदेश के हज़ारों बेरोजगार युवाओं और वर्तमान ग्राम रोजगार सहायकों पर पड़ेगा। सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन यह है कि अब पंचायत सचिव के पद पर नियुक्ति के लिए सीपीसीटी परीक्षा में उत्तीर्ण होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चयनित सचिव कंप्यूटर संचालन में दक्ष हों और पंचायत स्तर पर होने वाले डिजिटल कामों को बेहतर तरीके से संभाल सकें।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार पंचायत सचिव का पद अब जिला स्तरीय कैडर में शामिल होगा। इसका अर्थ यह है कि प्रत्येक जिले में पंचायत सचिवों की नियुक्ति उसी जिले के कैडर के माध्यम से की जाएगी। जितनी ग्राम पंचायतें होंगी, उतने ही सचिव पद उस जिले में उपलब्ध रहेंगे। इससे भर्ती प्रक्रिया में सरलता, पारदर्शिता और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने की संभावना होगी।
एक और महत्वपूर्ण परिवर्तन यह है कि सचिव पद की भर्ती में ग्राम रोजगार सहायकों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। कुल रिक्त पदों में 50 प्रतिशत पद आरक्षित रखे जाएंगे, जिन पर वही रोजगार सहायक पात्र होंगे जिन्होंने पांच वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो और सचिव पद के निर्धारित मापदंडों को पूरा करते हों। इससे लंबे समय से कार्यरत रोजगार सहायकों को स्थायी एवं उच्च पद पर नियुक्ति का अवसर मिलेगा।
नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सचिव पद पर वही व्यक्ति पात्र होगा जिसकी दो से अधिक जीवित संतान न हों, और इनमें से एक संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 के बाद न हुआ हो। यह प्रावधान परिवार नियोजन नीति को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भर्ती प्रक्रिया कर्मचारी selection बोर्ड द्वारा आयोजित पात्रता परीक्षा के माध्यम से होगी। जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रत्येक भर्ती वर्ष में अपने जिले के रिक्त पदों की जानकारी बोर्ड को भेजेंगे, जिसके आधार पर परीक्षा आयोजित की जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों की सेवा पुस्तिका और अन्य रिकॉर्ड तैयार कर जनपद पंचायत कार्यालय में सुरक्षित रखा जाएगा।



