150 की रफ़्तार में दौड़ती फ़ॉर्च्यूनर रेत से भरी ट्रॉली से भिड़ी, 5 दोस्तों की दर्दनाक मौत

Madhya Bharat Desk
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ग्वालियर में रविवार सुबह हुआ सड़क हादसा पूरे शहर को झकझोर कर रख देने वाला था। सुबह का समय, हल्की धूप और सुनसान सड़क—इसी दौरान तेज रफ़्तार से आ रही एक फ़ॉर्च्यूनर अचानक आगे चल रही रेत से भरी ट्रॉली में जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि गाड़ी के आगे का हिस्सा पूरी तरह उड़ गया और उसमें सवार पाँचों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में जान गंवाने वालों में 24 वर्षीय प्रिंस राजावत भी शामिल था, जो कारोबारी उमेश राजावत का इकलौता बेटा था। परिवार में वह तीन भाइयों में सबसे छोटा और सबसे दुलारा था। तेल और रियल एस्टेट का कारोबार करने वाले पिता की आँखों का तारा प्रिंस अगले साल शादी करने वाला था, जिसके लिए रिश्तों की बात चल रही थी। पिता का उसे घोड़ी पर बैठाने का सपना उसकी मौत के साथ ही टूट गया और पूरा परिवार गहरे सदमे में डूब गया।

हादसा इतना भीषण था कि फ़ॉर्च्यूनर के परखच्चे दूर-दूर तक बिखर गए। एक्सपर्ट्स के अनुसार गाड़ी की रफ़्तार लगभग 150 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जिस कारण टक्कर लगते ही इंजन से लेकर स्टीयरिंग तक सब चकनाचूर हो गया। एयरबैग फट गए, स्पीडोमीटर उड़ गया और गाड़ी का आगे का ढांचा पूरी तरह नष्ट हो गया। इतनी तेज रफ़्तार में वाहन को नियंत्रित करना बेहद कठिन होता है, और यही इस दुर्घटना का सबसे बड़ा कारण बना।

दूसरी ओर, हादसे से पहले की घटनाओं ने भी परिवार को और ज़्यादा विचलित कर दिया है। बताया गया कि प्रिंस ने फ़ॉर्च्यूनर अपने पिता को बिना बताए घर से निकाली थी। शनिवार रात आठ बजे पिता इसी गाड़ी से लौटे थे, जिसके बाद प्रिंस देर रात दोस्तों के साथ निकल गया। उसने किसी को कुछ नहीं बताया कि वह कहाँ जा रहा है। दो साल में एक बार मिलने वाले ये दोस्त उस रात एक साथ घूमते रहे। अंतिम बार उनकी बातचीत रात 10 बजे हुई थी, जब वे दीनदयाल नगर के पास सिंधिया स्टैच्यू के पास रुके थे। उसके बाद वे कहाँ-कहाँ गए, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है। सुबह चार बजे वे जोरासी मंदिर के पास चाय पीने पहुँचे, जहाँ वे अक्सर जाते थे। चाय पीकर वे आगे बढ़े ही थे कि कुछ देर बाद यह भीषण हादसा हो गया।

पाँचों दोस्तों की मौत ने ग्वालियर शहर में मातम का माहौल पैदा कर दिया है। परिवारजन और रिश्तेदारों में शोक की लहर है। खासकर प्रिंस के पिता अपने इकलौते बेटे को खोने के सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। जिस घर में अगले साल शहनाई बजनी थी, वहाँ आज सिर्फ सन्नाटा और रोने की आवाजें हैं।

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