छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों के हड़ताली कर्मचारियों पर प्रदेश सरकार द्वारा ESMA लगाए जाने को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को समझने के बजाय सीधे दमनकारी कदम उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय सरकार ने उन पर आपातकाल जैसी कार्रवाई कर दी।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को कर्मचारियों से संवाद करना चाहिए था, उनकी मांगों पर विचार कर समाधान निकालना चाहिए था, न कि ESMA लगाकर चेतावनी और कार्रवाई शुरू करनी चाहिए थी। PCC चीफ दीपक बैज ने कहा कि पिछले साल की तरह इस बार भी कांग्रेस के नेता धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण करेंगे और वास्तविक स्थिति को देखेंगे।
बैज ने आगे कहा कि धान खरीदी केंद्रों के कर्मचारी हड़ताल पर हैं और सरकार ने ‘गारंटी’ के नाम पर वादे किए थे, लेकिन अब उन्हीं कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने के बजाय सीधी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे तानाशाही बताते हुए कहा कि सरकार की नीयत साफ नहीं है, इसी वजह से समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
उधर, शासन का पक्ष है कि धान खरीदी की प्रक्रिया में बाधा डालने वाले कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सहकारिता विभाग ने हड़ताली कर्मियों से अपील की है कि वे शनिवार-रविवार तक काम पर लौट आएँ, अन्यथा सोमवार से कठोर कदम उठाए जाएंगे। विभाग का दावा है कि पूरे प्रदेश में धान खरीदी की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं और कंप्यूटर ऑपरेटरों से लेकर नोडल अधिकारियों तक की नियुक्तियाँ पहले ही हो चुकी हैं।
इस बीच, सहकारी समिति कर्मचारी संघ के कई प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों की सेवाएँ समाप्त कर दी गई हैं। जिन पर कार्रवाई की गई है, उनमें—
• प्रदेश अध्यक्ष और धमतरी के प्रबंधक नरेंद्र साहू
• महासचिव ईश्वर श्रीवास (राजनांदगांव)
• गोविंद नारायण मिश्र (चांपा पैक्स)
• कोषाध्यक्ष जागेश्वर साहू
• किशुन देवांगन (राजनांदगांव)
• तथा लखनपुर सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक शामिल हैं।
कर्मचारियों पर ESMA लगाए जाने और पदाधिकारियों पर की गई कार्रवाई से प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। धान खरीदी शुरू होने से पहले सरकार और कर्मचारियों के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।



