देश में बढ़ती खाद्य मिलावट बनी साइलेंट टेररिज्म, सरकार से सख्त कानून की मांग तेज

Madhya Bharat Desk
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देश में बढ़ती खाद्य मिलावट (Food Adulteration) अब किसी आतंकवाद से कम नहीं मानी जा रही है। रोजाना करोड़ों लोग जिस भोजन, दूध, तेल, मसालों और मिठाइयों का सेवन कर रहे हैं, उनमें छिपा “मिलावट का जहर” धीरे-धीरे उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के हालिया आंकड़े बताते हैं कि हर साल लाखों लोग मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह “धीमा ज़हर” अब एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है।

जनता की नाराज़गी भी बढ़ी:
कई नागरिकों का कहना है कि—

“देश की इस सरकार में अगर सबसे बड़ा कोई आतंकवाद है, तो वह मिलावट है। यह आम जनता के जीवन से खिलवाड़ है और हर घर में बीमारी फैला रही है।”

मिलावट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग

जनता, सामाजिक संगठनों और उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि मिलावटखोरों पर आतंकवाद जैसी कठोर सजा दी जाए। उनका कहना है कि जब तक मिलावट करने वालों के खिलाफ कड़े कानून नहीं बनेंगे, तब तक लोगों का स्वास्थ्य खतरे में रहेगा।

खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI) ने भी आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। विभाग का कहना है कि—

“किसी भी खाद्य पदार्थ को खरीदते समय उसकी FSSAI सील, पैकिंग क्वालिटी और एक्सपायरी डेट अवश्य जांचें। मिलावट के संदेह पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।”

देशभर में बढ़ते केस चिंता का विषय

त्योहारी सीजन में विशेष रूप से दूध, घी, मिठाइयों और मसालों में मिलावट के केस तेजी से बढ़ते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मिलावट सीधे लीवर, किडनी और हार्ट पर असर डालती है, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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