मुंबई: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम के दौरान भारत में बढ़ती आर्थिक विषमता पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश में गरीबों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि संपत्ति कुछ गिने-चुने अमीरों के पास केंद्रित होती जा रही है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति देश के आर्थिक और सामाजिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था का विकास ऐसा होना चाहिए जो रोजगार बढ़ाए और ग्रामीण भारत को सशक्त बनाए। केवल अमीरों तक संपन्नता सीमित रहना लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में वर्तमान में 1% अमीरों के पास देश की कुल संपत्ति का 40% हिस्सा है। यह स्थिति ब्रिटिश उपनिवेश काल से भी ज्यादा असमान मानी जा रही है। पूंजीवाद का यह मॉडल, जिसमें यह दावा किया गया था कि खुला बाजार और प्रतियोगिता से समृद्धि सब तक पहुँचेगी, विफल होता दिख रहा है।
इस आर्थिक मॉडल में:
- अमीर अपनी पूंजी से और अधिक पूंजी उत्पन्न कर रहे हैं,
- गरीबों की आय स्थिर बनी हुई है,
- और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी अमीरों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है।
गडकरी ने कहा कि अब जरूरत है एक ऐसी नीति की, जो विकास को केवल शहरी अमीर वर्ग तक सीमित न रखे, बल्कि गांवों और आम नागरिकों तक इसका लाभ पहुंचाए।







