दुनिया भर में बढ़ती भूख और कुपोषण की चुनौती के बीच भारत ने एक महत्वपूर्ण मानवीय पहल की है। देश ने अगले पांच वर्षों में दो लाख टन टूटे चावल की आपूर्ति करने का फैसला किया है, ताकि वैश्विक स्तर पर भूख से जूझ रहे लोगों को राहत मिल सके।
इस संबंध में (FCI) और संयुक्त राष्ट्र के (WFP) के बीच एक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह साझेदारी केवल खाद्यान्न आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की उस सोच को दर्शाती है जिसमें ‘कोई भी भूखा न रहे’ का संकल्प शामिल है।
क्या है समझौते की शर्तें?
- पांच साल की अवधि में कुल 2 लाख टन टूटे चावल की आपूर्ति
- हर वर्ष कीमत आपसी सहमति से तय होगी
- 31 मार्च 2026 तक के लिए दर 2,800 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित
- आवश्यकता पड़ने पर अवधि बढ़ाई जा सकती है
भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि WFP के साथ यह साझेदारी केवल एक व्यावसायिक समझौता नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी का निर्वहन है। उन्होंने कहा कि भारत न सिर्फ अपने नागरिकों बल्कि दुनिया भर में जरूरतमंद लोगों के साथ खड़ा है।
वहीं WFP के उप कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने इस समझौते को वैश्विक भूख के खिलाफ लड़ाई में एक अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि भारत का सहयोग आने वाले वर्षों में कमजोर और संकटग्रस्त आबादी तक पोषण पहुंचाने में निर्णायक साबित होगा।
‘जीरो हंगर’ लक्ष्य की ओर कदम
भारत एक कृषि प्रधान देश होने के साथ-साथ वैश्विक एकजुटता का भी समर्थक रहा है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के ‘Zero Hunger’ लक्ष्य को धरातल पर उतारने की दिशा में मजबूत कदम मानी जा रही है।
इस समझौते से भारत की छवि एक जिम्मेदार और भरोसेमंद वैश्विक भागीदार के रूप में और मजबूत होगी।



