बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के अंदर सीट बंटवारे को लेकर जारी खींचतान के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत बुधवार को तेजस्वी यादव से मिलने उनके आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच सीट बंटवारे को लेकर लंबी चर्चा हुई।
महागठबंधन में फिलहाल सीटों का अंतिम बंटवारा नहीं हो पाया है। सभी दल अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन कुछ सीटों पर टकराव की स्थिति बनी हुई है। मुकेश सहनी पहले ही कह चुके हैं कि महागठबंधन में सब कुछ ठीक है, लेकिन वे डिप्टी सीएम पद की इच्छा रखते हैं।
तेजस्वी यादव ने आज मीडिया से कहा, “कहीं कोई दिक्कत नहीं है, सब ठीक है। जल्द ही सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा।” इस बीच अशोक गहलोत उनके आवास पहुंचे और सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत की।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गहलोत की यह मुलाकात विशेष रूप से उन सीटों के विवाद को सुलझाने के लिए थी, जहां कांग्रेस और राजद के बीच सीधी टक्कर बन गई है। कांग्रेस ने 61 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए थे, लेकिन लालगंज से आदित्य राजा का नामांकन वापस लेने के बाद अब 60 सीटों पर मुकाबला जारी है। इनमें से 10 सीटें — वारसलीगंज, नरकटियागंज, कहलगांव, सुल्तानगंज, वैशाली, सिकंदरा, बछवाड़ा, बिहारशरीफ, करगहर और राजापाकड़ — पर कांग्रेस और राजद दोनों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं।
कांग्रेस के प्रदेश नेताओं ने पहले तेजस्वी यादव से गुजारिश की थी कि इन सीटों पर राजद अपने उम्मीदवारों को वापस ले, लेकिन बात नहीं बनी। ऐसे में अब गहलोत खुद मध्यस्थता के लिए आगे आए हैं। माना जा रहा है कि अगर बातचीत सफल रही, तो आज शाम तक कुछ सीटों पर उम्मीदवार नामांकन वापस ले सकते हैं, क्योंकि आज नाम वापसी की आखिरी तारीख है।
अब सभी की निगाहें इस मुलाकात के नतीजों पर टिकी हैं कि क्या अशोक गहलोत की कोशिशें महागठबंधन में चल रही तनातनी को थाम पाएंगी या नहीं।







