रायपुर, 13 अप्रैल 2026। गुजरात में गुजराती, महाराष्ट्र में मराठी, ओडिशा में उड़िया और बंगाल में बंगाली को गर्व से मातृभाषा के रूप में जनगणना में दर्ज कराने वाले अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के निवासी अब छत्तीसगढ़ी को अपनी असली पहचान दिलाने उतर पड़े हैं। राज्य आंदोलनकारी अनिल दुबे के नेतृत्व में ‘छत्तीसगढ़ी हमर मातृभाषा’ अभियान तेज हो गया है।
जनगणना 2026 में अनिवार्य रूप से छत्तीसगढ़ी को मातृभाषा के कॉलम में लिखवाने का संकल्प लिया गया है।
राज्य आंदोलनकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ी न केवल हमारी बोलचाल की भाषा है,
बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी। केंद्र सरकार को कामकाज की भाषा के रूप में भी इसे मान्यता देने की मांग तेज हो गई है। अनिल दुबे ने बताया कि जनगणना फॉर्म भरते समय लोग हिंदी या अन्य भाषा के बजाय छत्तीसगढ़ी ही लिखेंगे।
“हमारा छत्तीसगढ़, हमर छत्तीसगढ़ी। इसे दर्ज न कराना हमारी पहचान पर आघात है,” उन्होंने जोर देकर कहा।
यह आंदोलन छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से चली आ रही मांगों का हिस्सा है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि भाषाई जनगणना में छत्तीसगढ़ी को अलग दर्जा मिलने से शिक्षा, प्रशासन और मीडिया में इसकी मजबूती बढ़ेगी। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग समेत कई जिलों में जागरूकता रैलियां शुरू हो चुकी हैं।
सोशल मीडिया पर #ChhattisgarhiMatribhasha2026 और #छत्तीसगढ़ी_हमर_मातृभाषा हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी न हुई तो statewide हड़ताल और धरना-प्रदर्शन होंगे।
जनगणना अधिकारी से भी अपील की गई है कि फॉर्म में छत्तीसगढ़ी को स्पष्ट विकल्प बनाया जाए। छत्तीसगढ़वासी अब एकजुट होकर अपनी भाषा की रक्षा के लिए लामबंद हैं।







