प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में हुई भाजपा की रणनीतिक बैठक में नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि अब चुनावी फोकस “जंगलराज” से हटाकर “जॉबराज” पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के मतदाता के लिए 90 के दशक का जंगलराज इतिहास है, भय नहीं। इसलिए अब युवाओं को जोड़ने के लिए रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बैठक में मोदी ने कहा कि “सुनी हुई कहानी और जीए हुए अनुभव में फर्क होता है”। उन्होंने बताया कि बिहार की एक पूरी पीढ़ी ऐसी है जो जंगलराज को महसूस कर चुकी है, लेकिन आज के युवा के लिए यह केवल एक बीता हुआ दौर है।
भाजपा के सर्वे के मुताबिक बिहार में 7.43 करोड़ मतदाताओं में से करीब 16.5 लाख जेन-ज़ी युवा पहली बार वोट डालेंगे। इनमें से अधिकतर रोजगार, शिक्षा और माइग्रेशन जैसे मुद्दों पर निर्णय लेने वाले मतदाता हैं।
युवाओं के लिए ‘जंगलराज’ अब डेटा, डर नहीं
1990 से 2005 तक का दौर जहां पुराने मतदाताओं के लिए डर और अपराध की यादों से भरा रहा, वहीं 2000 के बाद जन्मे युवाओं के लिए यह सिर्फ सुनी हुई कहानी है।
नए वोटर अब अपराध की नहीं, नौकरी और अवसरों की कहानी चाहते हैं। भाजपा के अनुसार यही वर्ग बिहार के भविष्य की कुंजी है।
तेजस्वी के ‘2.5 करोड़ नौकरी’ वादे पर सवाल
राजद नेता तेजस्वी यादव ने हर घर से सरकारी नौकरी देने का दावा किया है, लेकिन भाजपा और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे “अवास्तविक वादा” बताया है।
भाजपा के सर्वे में यह बात सामने आई कि युवाओं को कानून व्यवस्था से ज्यादा रोजगार और सम्मान की चिंता है। कई युवा पूछते हैं —
“ठीक है, जंगलराज नहीं लौटेगा, लेकिन नौकरी कब मिलेगी?”
मोदी की रणनीति: भावनात्मक कनेक्शन और योजनाओं का प्रचार
प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे माता-पिता से मिली जंगलराज की यादों को युवाओं तक भावनात्मक रूप में पहुँचाएं।
साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार की रोजगार, शिक्षा और डिजिटल योजनाओं को युवाओं तक प्रभावी रूप से पहुँचाने पर बल दिया गया।
उन्होंने कहा कि अगर पुराना सिस्टम लौटा, तो राज्य की स्थिरता खतरे में पड़ जाएगी।
नवादा में 3.64 लाख जेन-ज़ी वोटर
नवादा जिले में कुल 17.16 लाख मतदाताओं में से 3.64 लाख जेन-ज़ी वोटर हैं — यानी लगभग 21% मतदाता पहली बार वोट डालेंगे।
यह वर्ग पारंपरिक वोटबैंक से हटकर रोजगार, शिक्षा और डिजिटल विकास पर ध्यान दे रहा है।
सर्वे में यह भी सामने आया कि बिहार के युवा 100% डोमिसाइल पॉलिसी और सरकारी नौकरी के अधिक अवसर चाहते हैं।







