उत्तर प्रदेश के धार्मिक एवं पर्यटन-महत्व वाले नगर अयोध्या में इस वर्ष आयोजित नवें दीपोत्सव (Deepotsav-2025) ने एक बार फिर इतिहास रचा है। इस आयोजन में विशेष रूप से दो रिकॉर्ड एक साथ टूटे हैं:
करीब 26 लाख 17 हजार 215 दीपक (दीए) एक ही क्षण में सजाए एवं जलाए गए।
इसी बीच, 2128 वेदाचार्यों द्वारा एक साथ महा-आरती संपन्न कराई गई।
समारोह की रूपरेखा
इस वर्ष दीपोत्सव में निम्नलिखित-मुख्य बिंदु रहे:
आयोजन का शुभारंभ इस नगर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।
देवी-देवताओं के मंदिर परिसर के प्रथम तल पर जाकर श्रीरामलला का पूजन-अर्चन, फिर दीप प्रज्वलन, एवं तत्पश्चात 56 घाटों-पर दीपों का आयोजन।
दीपोत्सव के दौरान 56 घाटों पर दीपों की सजावट की गई तथा लगभग 15 मिनट में 26 लाख से अधिक दीप जलाकर नया रिकॉर्ड स्थापित किया गया।
सरयू तट पर आयोजित महाआरती में 2128 वेदाचार्यों ने सामूहिक पूजा-आरती की, जिससे दूसरा रिकॉर्ड बनाया गया और इसे प्रमाणित करने हेतु प्रमाण-पत्र भी दिया गया।
शाम में एक विशेष लेज़र एवं ड्रोन शो का आयोजन भी हुआ जिसमें लगभग 1100 ड्रोन आसमान में विभिन्न आकृतियाँ बनाते हुए दिखाई दिए।
सामाजिक-आध्यात्मिक महत्व
यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव है बल्कि इसने अयोध्या को “विकास और विरासत का अद्भुत संगम” के रूप में स्थापित किया है, जैसा मुख्यमंत्री ने कहा।
इसके माध्यम से यह संदेश भी गया कि पारंपरिक-धार्मिक आयोजन आधुनिक तकनीक (ड्रोन-शो, लेज़र) के साथ कैसे जोड़े जा सकते हैं, जिससे युवा-पीढ़ी की भागीदारी और उत्साह बढ़ता है।
साथ ही, रिकार्ड-उद्घोषणा ने अयोध्या को एक वैश्विक मंच पर भी प्रस्तुत किया है, जहाँ धार्मिक, सांस्कृतिक और तकनीकी आयाम एक साथ जुड़े हैं।
आयोजन से पहले पर्याप्त समय में पहुँचें — भीड़ और यातायात की संभावना होती है।
घाटों की ओर स्थान चुनते समय सरयू तट जैसे खुले स्थानों को प्राथमिकता दें जहाँ दृश्य बेहतर मिल सके।
शाम-बाद के कार्यक्रम (ड्रोन-शो, लेज़र) के लिए हल्की ठंड का ध्यान रखें — हल्की जैकेट या शॉल उपयोगी होगी।
दीपक-जलाने एवं आरती-समारोह में भाग लेने के लिए आयोजकों द्वारा तय निर्देशों (सुरक्षा, स्थान-निर्देश) का पालन करें।



