बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर पूरे देश में उत्साह का माहौल है। केरल में काम करने वाले बिहार के हजारों प्रवासी मजदूर इस बार अपने मताधिकार का उपयोग करने के लिए अपने गृह राज्य लौटने की तैयारी में हैं। ये मजदूर लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लेकर वोट डालने का संकल्प ले चुके हैं।
लोकतंत्र के पर्व में सक्रिय भागीदारी
केरल में काम करने वाले अधिकांश प्रवासी मजदूर हर साल दिवाली और छठ पूजा के समय बिहार लौटते हैं, लेकिन इस बार चुनाव को लेकर उनमें अलग ही जोश है। वे लोकतंत्र की इस प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं।
प्रवासी मजदूरों की राय
औरंगाबाद जिले के एक मजदूर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “मैं अगले हफ्ते अपने गांव लौटूंगा ताकि वोट डाल सकूं। मुझे लगता है कि इस बार बिहार में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।” उसने बताया कि राज्य में बेहतर शासन और विकास के लिए सही नेतृत्व का चुनाव जरूरी है।
सीएमआईडी की रिपोर्ट
सेंटर फॉर माइग्रेशन एंड इन्क्लूसिव डेवलपमेंट (CMID) के सह-संस्थापक बिनय पीटर ने बताया कि केरल में रहने वाले बिहार के मजदूर ज्यादातर निर्माण, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में काम करते हैं। आमतौर पर वे छठ पूजा के अवसर पर घर लौटते हैं, लेकिन इस बार चुनाव के कारण लौटने वालों की संख्या अधिक रहने की उम्मीद है।
बड़ी संख्या में लौटेंगे प्रवासी श्रमिक
अनुमान है कि हजारों प्रवासी मजदूर वोट डालने के लिए बिहार रवाना होंगे। इससे न केवल मत प्रतिशत बढ़ेगा बल्कि यह लोकतांत्रिक चेतना की एक मजबूत मिसाल भी बनेगी।







