नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मंगलवार (7 अक्टूबर) को काठमांडू जिला पुलिस कार्यालय, भद्रकाली में इनके खिलाफ जनरेशन-जेड प्रदर्शन में हुई मौतों को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है।
काठमांडू जिला पुलिस के प्रवक्ता पवन भट्टाराई ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए पहले ही एक उच्च-स्तरीय न्यायिक आयोग का गठन किया जा चुका है। एफआईआर को न्यायमूर्ति गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले आयोग को भेजा गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि “जनरेशन-जेड के युवाओं द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी पूर्व पीएम ओली और लेखक की आपराधिक जवाबदेही तय करेगी और 8-9 सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शन की जांच को सक्षम बनाएगी। राज्य एजेंटों द्वारा किए गए गंभीर अपराध को बिना सजा नहीं छोड़ा जाना चाहिए।”
जानकारी के अनुसार, 8-9 सितंबर को हुए विरोध प्रदर्शनों में कुल 76 लोगों की मौत हुई थी। पहले दिन 19 प्रदर्शनकारी पुलिस की गोलीबारी में मारे गए थे। विरोध प्रदर्शन भ्रष्टाचार के खिलाफ और सोशल मीडिया पर सरकारी प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर शुरू हुआ था। इसके बाद प्रदर्शन और हिंसक हुए, कई सरकारी दफ्तरों में आग लगाई गई और अंततः ओली सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी।







