तीन महीने पहले ही बन गई थी खामेनेई को खत्म करने की योजना!

Madhya Bharat Desk
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इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। इजराइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को खत्म करने की योजना कई महीने पहले ही बना ली गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना को पिछले साल नवंबर में एक बेहद गोपनीय बैठक के दौरान अंतिम रूप दिया गया था। इस बैठक में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मौजूद थे।

उच्च स्तरीय बैठक में बना था प्लान

रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर में हुई इस सुरक्षा बैठक में खामेनेई को इजराइल के लिए बड़ा खतरा मानते हुए उन्हें निशाना बनाने का रणनीतिक फैसला लिया गया था।

रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने एक टीवी इंटरव्यू में बताया कि उस बैठक में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने खामेनेई को खत्म करने का लक्ष्य तय किया था।

पहले छह महीने बाद करने की थी योजना

बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन को शुरू में लगभग छह महीने बाद यानी 2026 के मध्य तक अंजाम देने की योजना बनाई गई थी। लेकिन ईरान के भीतर बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता के कारण इस ऑपरेशन की समय-सीमा को आगे बढ़ा दिया गया।

अमेरिका के साथ साझा की गई रणनीति

रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल ने इस मिशन की जानकारी अमेरिका के साथ भी साझा की थी। इजराइल को आशंका थी कि तेहरान में दबाव झेल रही सरकार पश्चिम एशिया में इजराइली और अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर सकती है।

‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के तहत कार्रवाई

खामेनेई को निशाना बनाने की कार्रवाई कथित तौर पर “ऑपरेशन रोरिंग लायन” और “एपिक फ्यूरी” के शुरुआती चरण में की गई।

बताया जा रहा है कि यह पहली बार है जब किसी संप्रभु देश के शीर्ष नेता को हवाई हमले में निशाना बनाया गया।

ईरान पर हमले तेज

इस घटना के बाद इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपने हवाई हमलों को और तेज कर दिया है। इजराइली रक्षा बल (IDF) के अनुसार, तेहरान में हमलों की 12वीं लहर पूरी की जा चुकी है।

अलबरज प्रांत में सैन्य ठिकाने निशाने पर

इन हमलों के दौरान अलबरज प्रांत में स्थित एक विशेष सुरक्षा इकाई के मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया। यह इकाई ईरान के आंतरिक सुरक्षा बलों का संचालन करती है।

इसके अलावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बासिज अर्धसैनिक बलों से जुड़े कई ठिकानों पर भी हमले किए गए।

इजराइली वायु सेना के मुताबिक, अभियान के दौरान हथियारों के भंडारण और उत्पादन से जुड़ी कई अन्य साइटों को भी निशाना बनाया गया है।

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