वित्त सचिव के स्पष्ट निर्देशों की खुली अवहेलना, सिंगल विलेज की जगह मल्टी विलेज योजनाओं में चहेती एजेंसियों को भुगतान; क्या कार्रवाई सिर्फ कागजी खानापूर्ति होगी?
रायपुर।राज्य के महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन (JJM) में भुगतान को लेकर मची वित्तीय अनियमितता और नियमों की खुली अवहेलना ने अब एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बवंडर खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह गड़बड़ी सिर्फ निचले अधिकारियों की मनमानी का नतीजा है, या फिर इसे संबंधित मंत्री के मौन संरक्षण में अंजाम दिया गया?
वित्त सचिव के आदेश की अवहेलना, एडिशनल MD की भूमिका पर संदेह
वित्त विभाग के सचिव मुकेश बंसल ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राज्यांश की राशि का उपयोग केवल सिंगल विलेज योजनाओं में किया जाए। सूत्रों के अनुसार, इन निर्देशों की जानकारी JJM के एडिशनल मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) को थी, बावजूद इसके, कई जिलों में जानबूझकर आदेश को ताक पर रखा गया। निर्देशों की अनदेखी करते हुए मल्टी विलेज योजनाओं में चुनिंदा निर्माण एजेंसियों को करोड़ों का भुगतान कर दिया गया। विभागीय गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि एडिशनल MD की भूमिका संदिग्ध है और उनके स्तर पर बिना उच्च सहमति के इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता संभव नहीं है।
ठेकेदारों का भुगतान रोका: क्या सिर्फ ‘बलि का बकरा’ खोजा जा रहा?
अनियमित भुगतान पर पर्दा डालने की कोशिश में, अब विभाग ने अप्रयुक्त राशि को 15 दिन के भीतर वापस करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया है। इस अचानक लिए गए निर्णय से निर्माण एजेंसियां और ठेकेदार सकते में हैं। उनका कहना है कि पूरा कार्य होने के बावजूद उनका भुगतान रोक दिया गया है, जिससे उनकी अन्य परियोजनाएं भी ठप हो गई हैं।
सवाल यह उठता है कि जब वित्त सचिव के आदेश की अवहेलना हुई, तो क्या कार्रवाई सिर्फ ठेकेदारों की राशि रोक कर मामले को दबाने की है?
मंत्री और एडिशनल MD पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में संबंधित विभाग के मंत्री की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। मंत्री के संज्ञान में यह मामला आने के बावजूद, किसी भी बड़े अधिकारी या जिम्मेदार एडिशनल MD पर तत्काल सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या मंत्री नहीं जानते थे कि उनके विभाग में वित्त सचिव के आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाला जा रहा है?
अब जांच की नौटंकी? जनता की मांग – सख्त कार्रवाई
सचिव बंसल ने अब मामले की जांच का आश्वासन दिया है और आवश्यक होने पर कार्यवाही की बात कही है। लेकिन ठेकेदारों और आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह जांच भी पिछली जांचों की तरह सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी?
जनता की स्पष्ट मांग है कि वित्तीय अनियमितताओं में शामिल एडिशनल MD समेत सभी दोषी अधिकारियों पर सेवा समाप्ति जैसी सख्त कार्रवाई हो, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगे। अन्यथा, यह साफ संदेश जाएगा कि नियमों को तोड़ना और जनता के पैसे को लूटना आसान है।







