जल जीवन मिशन बना वसूली मिशन: भ्रष्टाचार ने छीना ग्रामीणों का हक

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और अफसरों की चालबाजी का शिकार हो गया है। जनता तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की बजाय अफसरों ने इस योजना को अपनी जेब भरने का साधन बना लिया है। मंत्री को गुमराह किया जा रहा है और ऊपरी अधिकारियों की पूरी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, विभाग में मंत्री के चहेते अफसर जो बहुत जूनियर हैं, उन्हें सीधे वरिष्ठ पद पर बैठा दिया गया है। वहीं, जगदलपुर में मंत्री के चहेते व्यक्ति जो गैर विभागीय है दोनों ने कार्यशैली को पूरी तरह बदल दिया है। इन दोनों की मिलीभगत से पूरा सिस्टम अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। ठेकेदारों के बीच यह आम चर्चा है कि मंत्री के नाम से विभाग के भ्रष्ट अधिकारी वसूली कर रहे है।

जिलों में ठेकेदारों की मांग के हिसाब से जिलों के अधिकारियों द्वारा विभाग से बिल वाइस डिमांड किया गया। विभागीय अधिकारियों ने डिमांड के अनुसार जिलों में पैसा भेजा, लेकिन ऊपरी अधिकारियों ने जिलों के अधिकारियों को आदेश दिया कि ठेकेदारों के पेमेंट रोक दिए जाएं। इसके बाद सभी जिलों के अधिकारियों को बुलाकर भारी-भरकम पैसों की डिमांड की गई। छोटे-छोटे ठेकेदार जिनके 5 लाख, 10 लाख या फिर सिर्फ 10-20 हजार रुपये बकाया हैं, उनसे भी रकम की मांग की गई।

स्थिति यह है कि यदि 100 प्रतिशत भुगतान में से 80 प्रतिशत भी आ जाए तो उसे बहुत मान लिया जा रहा है क्योंकि पूरा पैसा कभी आता ही नहीं। इसलिए बड़े ठेकेदारों को पेमेंट करना शुरू किया गया एडवांस पैसा ले करके और उसमें विभागीय अधिकारी व मंत्री के चहेते अधिकारी ने 2 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली की। सवाल उठता है कि जब अधिकारी ही जिम्मेदार हैं तो उनके खिलाफ निलंबन या कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।

इस भ्रष्टाचार का असर सीधे जनता पर पड़ा है। गांवों में पाइपलाइनें अधूरी पड़ी हैं, पेयजल आपूर्ति पूरी तरह रुकी हुई है और ग्रामीण स्वच्छ पानी के लिए तरस रहे हैं। दूसरी तरफ ठेकेदारों का भुगतान अटकने से वे आर्थिक संकट में हैं। नतीजा यह है कि पूरा विकास कार्य ठप हो चुका है।

मंत्री को गुमराह किया जा रहा है या फिर वे जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं—यह बड़ा सवाल है। ऊपरी अधिकारियों को सबकुछ पता होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाना यह साबित करता है कि पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार की गिरफ्त में है।

छत्तीसगढ़ का जल जीवन मिशन अब ड्रीम प्रोजेक्ट न होकर वसूली प्रोजेक्ट बन चुका है। सरकार को चाहिए कि तत्काल जांच कर जिम्मेदार अफसरों और मिलीभगत करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे ताकि जनता को उनका हक मिल सके और इस योजना का असली उद्देश्य पूरा हो सके।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment