छोटे ठेकेदारों की अनदेखी, भुगतान में मनमानी से विवाद
जल जीवन मिशन के कामकाज में रफ्तार थमने के साथ-साथ विवाद गहराता जा रहा है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने से अधिकांश काम ठप हो गए हैं। विभाग ने जिलों को आबंटित राज्यांश की राशि वापस लेकर चुनिंदा मल्टी विलेज योजनाओं वाली बड़ी एजेंसियों को भुगतान कर दिया, जिससे सिंगल विलेज योजनाओं पर काम करने वाली छोटी एजेंसियों में आक्रोश फैल गया है।
छोटी एजेंसियां अब आर्थिक संकट से जूझ रही हैं और बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं। फील्ड स्तर पर मिशन की हालत देखकर यह नहीं लगता कि हालात जल्दी सामान्य होंगे। कुछ माह पहले वित्त विभाग की गाइडलाइन के तहत सिंगल विलेज योजनाओं के भुगतान के लिए 371 करोड़ रुपए का राज्यांश जारी किया गया था, लेकिन विभागीय भ्रष्ट अफसरों ने मंत्री के सहमति से नियमों को दरकिनार करते हुए मल्टी विलेज योजनाओं की चहेती एजेंसियों को प्राथमिकता दे दी।
सूत्रों के मुताबिक, लगभग 60 से 65 करोड़ रुपए की राशि वापस लेकर बड़े ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया। रसूखदार कंपनियों ने अपने प्रभाव के दम पर बिल पास करवा लिए, जबकि छोटे ठेकेदारों और एजेंसियों के भुगतान तकनीकी आपत्तियों और दस्तावेजी खामियों के नाम पर रोक दिए गए। यही वजह है कि अब सिंगल विलेज वाली एजेंसियां लामबंद होकर विरोध की तैयारी कर रही हैं।
कई सिंगल विलेज योजनाओं में “हर घर नल से जल” का दावा किया गया है, लेकिन बिना भुगतान के राशि वापस लेना अफसरों की मनमानी को दर्शाता है। इस बीच विभागीय अफसर पदस्थापना को लेकर भी सवालों के घेरे में हैं।
पदोन्नति के बाद भी पदस्थापना अटकी
विभाग में हाल ही में हुए प्रमोशन के बाद कई अफसरों की नई पदस्थापना रोक दी गई है। इसमें अनुविभागीय अधिकारी से कार्यपालन अभियंता और कार्यपालन अभियंता से अधीक्षण अभियंता तक के अधिकारी शामिल हैं। अफसरशाही की खींचतान और कुछ रसूखदार अधिकारियों की पकड़ के चलते विभाग में असंतोष गहराता जा रहा है।







