रायपुर। छत्तीसगढ़ में नई सरकार की ‘मोदी की गारंटी’ अब जनता के लिए सवालों का विषय बन चुकी है। चुनाव के समय भाजपा ने बड़े-बड़े वादे किए थे, जिनमें बिजली बिलों से राहत और 24 घंटे बिजली आपूर्ति का भरोसा भी शामिल था। लेकिन सत्ता में आने के बाद सबसे पहले हाफ बिजली बिल योजना को बंद कर दिया गया, जिससे जनता की जेब पर बोझ और बढ़ गया। कांग्रेस सरकार की इस योजना के तहत 400 यूनिट तक 50% सब्सिडी मिलती थी और लाखों परिवारों को सीधा फायदा हो रहा था। अब योजना खत्म होते ही जनता को बढ़े हुए बिलों का सामना करना पड़ रहा है।

चुनाव के दौरान भाजपा ने मोदी गारंटी के तहत कई वादे किए थे। इनमें रायपुर, नया रायपुर, दुर्ग और भिलाई के लिए स्टेट कैपिटल रीजन की स्थापना, शहरी समृद्धि योजना, जल-जमाव से राहत के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, 2027 तक सभी राज्य मार्गों को बारहमासी उपयुक्त बनाना, इलेक्ट्रिक वाहनों पर 35% सब्सिडी, हर जिले में इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर, लॉजिस्टिक्स नीति और सबसे अहम – 24×7 बिजली आपूर्ति और अनियमित बिजली बिलों से राहत देने का वादा शामिल था।
लेकिन आज जनता कह रही है कि वादों की चमक अब फीकी पड़ चुकी है। बिजली में करंट तो आया, लेकिन राहत कहीं नजर नहीं आ रही। महंगे बिलों ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है और वे पूछ रहे हैं कि क्या मोदी गारंटी सिर्फ चुनावी नारा थी। विपक्ष भी इसे बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रहा है।



