मनुष्य और वन्यजीव का संगम: सनातन संस्कृति को जीवंत करते छत्तीसगढ़ के ‘बेयर बाबा’

Madhya Bharat Desk
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मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भारतपुर (छत्तीसगढ़): जंगलों के बीच एक ऐसा नजारा देखने को मिलता है, जो इंसान और जानवर के रिश्ते की गहरी मिसाल पेश करता है। यहाँ साधु सीताराम, जिन्हें लोग प्यार से ‘बेयर बाबा’ कहते हैं, बीते 11 सालों से स्लॉथ भालुओं के साथ दोस्ती निभा रहे हैं।

हाल ही में सामने आए एक वीडियो में बाबा सात भालुओं को अपने हाथों से खाना खिलाते नजर आ रहे हैं। बाबा और भालुओं के बीच यह आत्मीय रिश्ता देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।

2013 से शुरू हुआ सफर

बेयर बाबा और इन भालुओं की दोस्ती साल 2013 में शुरू हुई थी। तब से लेकर आज तक बाबा नियमित रूप से उन्हें खाना खिलाते हैं और उनके साथ समय बिताते हैं।

स्थानीय लोग बताते हैं कि यह रिश्ता सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी विश्वास और स्नेह पर टिका है।

सनातन संस्कृति का उदाहरण

बाबा का यह कार्य न केवल करुणा और सहअस्तित्व की भावना का प्रतीक है, बल्कि सनातन संस्कृति की उस मूल भावना को भी जीवंत करता है, जिसमें मनुष्य और प्रकृति को एक-दूसरे का अभिन्न हिस्सा माना गया है।

इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोरी हैं। लोग इसे “प्रकृति और पशुओं से प्रेम” का अद्भुत उदाहरण बता रहे हैं।

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