कोल लेवी मामले ने एक बार फिर से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस घोटाले के मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी पर पहले ही अवैध वसूली और पैसों के लेन-देन का आरोप लग चुका है। अब ताज़ा जानकारी में महिला चिकित्सक का नाम सामने आना मामले को और पेचीदा बना रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ईडी को कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनमें पैसों के लेन-देन का उल्लेख है। आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव की पति द्वारा महिला चिकित्सक के खाते में 40 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे और बाकी रकम नकद में दी गई। इससे ईडी को संदेह है कि यह पूरा मामला मनी लॉन्ड्रिंग और डायवर्जन ऑफ मनी से जुड़ा है, जिसमें कोल लेवी से वसूली गई रकम को ब्लैक से व्हाइट किया गया।
ईडी ने महिला चिकित्सक को कई बार समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुईं। हाल ही में उन्हें सात घंटे तक ईडी ऑफिस में पूछताछ की गई, जहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। हालांकि, महिला चिकित्सक ने एजेंसी से दो दिन का वक्त मांगा है ताकि वे अपने वकील से सलाह-मशविरा कर आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकें।
गौरतलब है कि इस मामले में सूर्यकांत तिवारी, निलंबित आईएएस रानू साहू, समीर विश्नोई और पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ये चारों आरोपी लगभग दो साल तक जेल में रह चुके हैं और हाल ही में उन्हें सख्त शर्तों के आधार पर जमानत मिली है।
यह मामला न केवल राजनीतिक गलियारों में बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह सवाल खड़ा करता है कि सत्ता और प्रशासन से जुड़े बड़े लोग किस तरह अवैध लेन-देन के जरिए कानून और व्यवस्था को चुनौती देते हैं।







