छत्तीसगढ़ में शनिवार को विद्यालयों के समय को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राज्य के शालेय शिक्षक संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि शनिवार को भी विद्यालय उसी प्रकार प्रातःकालीन समय पर संचालित हों, जिस प्रकार अन्य दिनों में होते हैं। उनका मानना है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास शारीरिक, मानसिक, नैतिक और व्यावहारिक शिक्षा के माध्यम से होना चाहिए।
संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र दुबे ने कहा कि व्यायाम से शरीर मजबूत होता है, वहीं योग और प्राणायाम से मानसिक संतुलन बनता है और बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। यही कारण है कि सुबह का समय इन गतिविधियों के लिए सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि इन्हें खाली पेट किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी योग और प्राणायाम को शिक्षा का हिस्सा बनाने पर जोर दिया है। ऐसे में यदि शनिवार को सुबह स्कूल न लगाया जाए, तो बच्चों के सर्वांगीण विकास में बाधा उत्पन्न होगी।
इस पूरे विवाद का मूल कारण शिक्षा विभाग का वह आदेश है जिसमें शनिवार को विद्यालय का समय बदलने की बात कही गई थी। शिक्षक संघ का स्पष्ट मत है कि सुबह का समय बच्चों के लिए सबसे उपयोगी और स्वास्थ्यवर्धक है। इसलिए शनिवार को विद्यालयों का संचालन भी प्रातःकालीन समय पर ही होना चाहिए, ताकि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़े।







