नई दिल्ली।कांग्रेस पार्टी, इंडी गठबंधन और उससे जुड़ा इकोसिस्टम बीते दिनों से कथित वोट चोरी अभियान को जमकर प्रचारित कर रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद आम जनता इस कैंपेन से खुद को जोड़ती नज़र नहीं आ रही है।
जनता ने क्यों ठुकराया कैंपेन
राहुल गांधी के एनजीओ-स्टाइल अभियानों को बार-बार लोगों ने खारिज किया है। पिछले 11 वर्षों से वे लगातार ट्रायल एंड एरर की राजनीति करते दिखाई दे रहे हैं। फेक न्यूज से लेकर EVM पर सवाल उठाने तक हर बार उनके आरोप जनता पर असर डालने में नाकाम रहे हैं।
वोटर लिस्ट विवाद भी हुआ बैकफायर
हाल ही में कांग्रेस ने वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा शोर मचाया, प्रेस कॉन्फ्रेंस की, वेबसाइट लॉन्च की, यहां तक कि गाने भी बनवाए। लेकिन राजधानी दिल्ली तक में कोई बड़ा प्रदर्शन देखने को नहीं मिला। जनता का मानना है कि अगर आरोप इतने बड़े होते तो सबूत चुनाव आयोग या अदालत में पेश किए जाते, न कि सिर्फ प्रचार में।
जनता का भरोसा मोदी पर कायम
विश्लेषकों का मानना है कि पिछले दो दशकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति ने जनता के मन में गहरा विश्वास पैदा किया है। लोग मानते हैं कि मोदी देश और संविधान के खिलाफ कुछ नहीं कर सकते। यही वजह है कि कांग्रेस का यह कथित वोट चोरी अभियान जनता में पकड़ नहीं बना पा रहा है और सिर्फ उसके IT सेल और इकोसिस्टम तक सीमित रह गया है।







