छत्तीसगढ़। हसदेव अरण्य की जिस केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की पर्यावरणीय और वन स्वीकृति पूर्व कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने रोकी थी उस खदान की स्वीकृति बीजेपी की विष्णुदेव साय सरकार ने दे दी।
हसदेव अरण्य क्षेत्र में केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को मिली हालिया पर्यावरणीय और वन स्वीकृति ने एक बार फिर विवादों को जन्म दे दिया है। यह वही खदान है जिसकी स्वीकृति पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने रोक दी थी, लेकिन अब वर्तमान भाजपा सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है, जिससे पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है।

यह कोल ब्लॉक राजस्थान को आवंटित है, और इसका माइन डेवलपर और ऑपरेटर (MDO) अनुबंध अदानी समूह के पास है। इस परियोजना को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसका पर्यावरणीय प्रभाव है। जानकारी के अनुसार, इस खदान का 95 प्रतिशत क्षेत्र जंगल है, और इसके संचालन से 1742 हेक्टेयर वन भूमि में 5 लाख से अधिक पेड़ काटे जाने का अनुमान है। यह न केवल जैव विविधता के लिए खतरा है, बल्कि सरगुजा के प्रसिद्ध रामगढ़ पहाड़ के विनाश का कारण भी बन सकता है।

अभी तक भाजपा सरकार पेड़ों की कटाई का दोष पिछली कांग्रेस सरकार पर मढ़ रही थी, लेकिन केते एक्सटेंशन की स्वीकृति ने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। आलोचकों का कहना है कि यह निर्णय कांग्रेस के पूर्ववर्ती रुख को पलटकर अदानी समूह के व्यावसायिक हितों को साधने के लिए लिया गया है।
इस मामले पर राजस्थान की भजनलाल भाजपा सरकार पर भी उंगलियां उठ रही हैं। आरोप है कि राजस्थान सरकार अदानी के फायदे के लिए छत्तीसगढ़ के बहुमूल्य वन संसाधनों का विनाश करने पर आमादा है। इस संदर्भ में, राजस्थान के मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करने की मांग की गई है कि हसदेव की वर्तमान में संचालित खदानों से कितना कोयला राजस्थान के प्लांटों में जा रहा है और कितना अदानी के प्लांटों में।


पर्यावरण कार्यकर्ता और स्थानीय समुदाय इस स्वीकृति को तत्काल निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि हसदेव अरण्य क्षेत्र, जो अपने घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, को बचाने के लिए ऐसे विनाशकारी परियोजनाओं को रोका जाना अत्यंत आवश्यक है।



