छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में अमानक गुणवत्ता की दवाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश के कई जिलों से लगातार मिल रही शिकायतों और राष्ट्रीय मीडिया में आ रही खबरों के बावजूद, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का यह दावा कि CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन) गुणवत्तापूर्ण सेवाएं दे रहा है, जनता के लिए आश्चर्य और आक्रोश का विषय बन गया है।
मंत्री के इस बयान ने प्रदेशवासियों को और भ्रमित कर दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब दवाएं उपयोग करने लायक नहीं रहीं, तब सरकार किस गुणवत्ता की बात कर रही है? इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CGMSC की ओर से प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों और वेयरहाउस में भेजी गई Cipcal D3 नामक कैल्शियम की लगभग 6500 यूनिट दवाएं खराब पाई गईं। इन दवाओं को स्ट्रिप से बाहर निकालते ही वे चूर्ण में बदल जा रही हैं। ये दवाएं खासकर गर्भवती महिलाओं और हड्डी रोगियों के लिए दी जाती थीं। अब इनका उपयोग रोक दिया गया है।
इन खराब दवाओं के कारण कई अस्पतालों में कैल्शियम की भारी कमी हो गई है। जांच में सामने आया है कि कम से कम 7 जिलों में भेजी गई यह दवा पूरी तरह अनुपयोगी है। यह भी सामने आया कि दवा की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही हुई, जिससे हजारों मरीजों को जरूरी सप्लीमेंट नहीं मिल पा रहा।
सिर्फ एक ही दवा नहीं, रिपोर्ट्स के अनुसार बीते एक महीने में 5 से अधिक दवाएं और मेडिकल सप्लाई गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो चुकी हैं। इसके बावजूद CGMSC के किसी भी अधिकारी पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, न ही किसी पर आपराधिक जिम्मेदारी तय की गई।

ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने फिलहाल सभी 6500 यूनिट Cipcal D3 दवा पर रोक लगा दी है और विस्तृत जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही संबंधित कंपनियों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
बावजूद इसके, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मीडिया में कहा कि “दवाइयों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा और CGMSC ने राज्य की स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता को बनाए रखा है।”
लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि अगर समय रहते दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घोटाला प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन जाएगा।



