रायपुर।छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में 1.89% की वृद्धि के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट 10 से 20 पैसे की बढ़ोतरी को राज्य के उपमुख्यमंत्री ने ‘मामूली और आवश्यक कदम’ बताया है। लेकिन इस बयान ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है।
सरकार का पक्ष: बढ़ती लागत की भरपाई ज़रूरी
उपमुख्यमंत्री का कहना है कि बिजली कंपनियों की लागत और घाटा बढ़ रहा था, जिसे संतुलित करने के लिए यह छोटी सी दर वृद्धि जरूरी हो गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि छत्तीसगढ़ में बिजली दरें अभी भी कई अन्य राज्यों की तुलना में कम हैं, और इससे आम जनता पर सीधा असर नगण्य होगा।
विपक्ष का वार: जब असर नहीं है, तो बढ़ोतरी क्यों?
विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि अगर यह बढ़ोतरी वाकई ‘मामूली’ है, तो इसकी जरूरत ही क्यों पड़ी?
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की जेब पर बोझ डालने का काम कर रही है, जबकि महंगाई पहले से ही चरम पर है।
आम लोगों की चिंता: छोटी बढ़ोतरी, बड़ा असर
आम उपभोक्ताओं का कहना है कि हर महीने बिजली का बिल उनके घर के बजट का अहम हिस्सा होता है। 10–20 पैसे की वृद्धि भले ही सुनने में कम लगे, लेकिन यह महीने के अंत में कुल बिल पर बड़ा असर डालती है।
लोगों ने सरकार से अपील की है कि वे जनता की ज़रूरतों और वर्तमान महंगाई को ध्यान में रखते हुए ऐसे फैसलों से परहेज करें।
राजनीतिक बहस के संकेत
यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले चुका है। आने वाले दिनों में विधानसभा और मीडिया दोनों में इस पर और बहस की संभावना जताई जा रही है।
विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह इस निर्णय को जनता के बीच प्रमुख मुद्दे के तौर पर उठाएगा।







