बेंगलुरु।सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया गया है कि बेंगलुरु के एक खुदरा सब्ज़ी विक्रेता को राज्य GST विभाग से नोटिस मिला है। वीडियो में व्यक्ति यह बताते हुए नजर आ रहा है कि उसे GST रजिस्ट्रेशन और टैक्स से जुड़ा नोटिस मिला है, जिसके बाद लोगों में भ्रम और चिंता का माहौल बन गया है।
वीडियो के अनुसार, यह नोटिस केंद्रीय GST विभाग से नहीं बल्कि कर्नाटक राज्य GST विभाग से जारी किया गया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसे ही लाखों खुदरा विक्रेता भारत के अन्य राज्यों में भी हैं, तो केवल बेंगलुरु में ही ऐसा नोटिस क्यों?
क्या UPI को निशाना बना रहा है यह वायरल वीडियो?
विशेषज्ञ मानते हैं कि खुदरा सब्जी विक्रेताओं के पास आमतौर पर GST नंबर नहीं होता, क्योंकि वे GST के दायरे में नहीं आते। ऐसे में किसी सब्जी बेचने वाले को नोटिस मिलना और उसका वीडियो वायरल होना, कहीं न कहीं UPI पेमेंट सिस्टम को लेकर आम जनता में भय पैदा करने की कोशिश जैसा प्रतीत हो सकता है।

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाए हैं कि क्या इस तरह के वीडियो का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को बदनाम करना है? कई यूज़र्स का मानना है कि ऐसे वीडियो भ्रम फैलाते हैं और UPI जैसे सफल डिजिटल सिस्टम की विश्वसनीयता को कमजोर करने का प्रयास करते हैं।
GST अधिकारियों की सफाई और जनता की चिंता
अब तक इस वायरल वीडियो पर किसी सरकारी पुष्टि या स्पष्टीकरण की जानकारी नहीं आई है। लेकिन अगर इस तरह के नोटिस वास्तव में जारी किए जा रहे हैं, तो सरकार और GST विभाग को इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और पारदर्शिता से स्थिति साफ करनी चाहिए।
यह मामला सिर्फ एक नोटिस का नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि क्या छोटे व्यापारियों को डराने और डिजिटल भुगतान प्रणाली की छवि खराब करने की रणनीति चल रही है? जरूरी है कि सरकारी एजेंसियां सही तथ्यों के साथ सामने आएं, ताकि जनता में विश्वास बना रहे और डिजिटल इंडिया की नींव मजबूत हो।



