रायपुर।छत्तीसगढ़ में हाल ही में सामने आए मानव तस्करी के मामले ने राज्यभर में चिंता बढ़ा दी है। खासकर तब, जब इसमें ईसाई मिशनरियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि महिला सुरक्षा और मानव तस्करी के विरुद्ध बनाए गए कानूनों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए बड़ी संख्या में आदिवासी लड़कियों को राज्य से बाहर ले जाया जा रहा है।
मानव तस्करी का शिकार बनाई जा रही तीन लड़कियों में से एक ने बताया कि उसे रसोइया की नौकरी का झांसा दिया गया था। रास्ते में उसने गांव वापस लौटने की इच्छा जताई, लेकिन बिचौलिए ने रेलवे टिकट का हवाला देकर मना कर दिया। लड़की ने यह भी बताया कि न तो वह बिचौलिए को जानती थी और न ही साथ जा रही ननों को।
दूसरी लड़की ने बताया कि उसे नर्सिंग ट्रेनिंग और घरेलू काम के नाम पर ले जाया जा रहा था। उसने यह भी स्वीकार किया कि उसने पांच साल पहले मतांतरण किया था और अब वह ईसाई धर्म स्वीकार कर चुकी है। हालांकि, वह इस “हृदय परिवर्तन” के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बता सकी और न ही यह स्पष्ट कर सकी कि उसने विधिक रूप से धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी की है या नहीं।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में भूपेश बघेल की पूर्ववर्ती सरकार के दौरान कांग्रेस नेताओं की बस्तर को लेकर विवादास्पद बयानबाज़ी चर्चा में थी। अब जब मिशनरियों पर मानव तस्करी के गंभीर आरोप लगे हैं, तो कांग्रेस उनके समर्थन में खड़ी नजर आ रही है, जिससे राजनीतिक विवाद भी गहराता जा रहा है।
हालांकि, वर्तमान मुख्यमंत्री जो स्वयं जनजातीय समाज से आते हैं, उन्होंने इस संवेदनशील मामले में सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार की कार्रवाई की गूंज देशभर में सुनाई दे रही है। प्रशासन दोषियों की गहराई से जांच कर रहा है और कानून का उल्लंघन करने वालों को कड़ी सजा दिलाने के प्रयास में जुटा है।
छत्तीसगढ़ की जनता को उम्मीद है कि सरकार इस मुद्दे पर बिना दबाव के सख्ती से कार्रवाई करेगी और राज्य की बेटियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।







