मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की राह पहले ही मुश्किलों से भरी है, और अब शिक्षक भर्ती के नए नियमों ने युवाओं की उम्मीदों को गहरी चोट दी है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए स्पष्ट कहा है कि यह केवल नियमों में बदलाव नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि बेरोज़गारी से जूझ रहे छात्रों के लिए यह परीक्षा एक उम्मीद थी, लेकिन कर्मचारी चयन बोर्ड की मनमानी ने इस अवसर को भी संदेह के घेरे में डाल दिया है।
बोर्ड द्वारा किए गए तीन बड़े बदलाव खास तौर पर चिंता का कारण हैं:
1. डिग्री पूरा करने की समयसीमा को काउंसलिंग से घटाकर 1 अगस्त तक कर देना – इससे हज़ारों फाइनल ईयर बीएड/डीएलएड छात्र परीक्षा से बाहर हो जाएंगे।
2. संस्कृत और उर्दू को परीक्षा विकल्पों से हटाना – इससे इन विषयों से TET पास करने वाले अभ्यर्थी सीधे अपात्र हो गए हैं।
3. सिलेबस में अंतिम समय पर बदलाव करना – जिससे छात्र सही ढंग से तैयारी नहीं कर सके।
कमलनाथ ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के विपरीत है। जिस राज्य में पहले से ही हजारों पद खाली हैं, वहाँ इस तरह के नियम बनाना युवाओं के साथ अन्याय है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि:
पूर्ववर्ती नियमों को बहाल किया जाए,
सभी विषयों को समान अवसर दिया जाए,
और सिलेबस की स्पष्टता पहले से तय की जाए।
“युवाओं को भ्रमित करना बंद करें। उन्हें अवसर दें, उनके साथ न्याय करें। मध्य प्रदेश का भविष्य इन छात्रों में है और हम उनके अधिकारों के लिए हर मंच पर आवाज़ उठाते रहेंगे,” – कमलनाथ ने दो टूक कहा।



