गाजा पट्टी में मानवीय हालात दिनों-दिन गंभीर होते जा रहे हैं। दक्षिणी गाजा में शनिवार को राहत सामग्री प्राप्त करने के लिए इकट्ठा हुई भीड़ पर गोलीबारी की गई, जिसमें 50 से अधिक फलस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए हैं। यह घटना उस समय हुई जब लोग गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन (जीएचएफ) के खाद्य वितरण केंद्र की ओर बढ़ रहे थे।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, खान यूनिस के पास के तेइना क्षेत्र में जीएचएफ केंद्र के पास सैकड़ों लोग पैदल चलकर जा रहे थे, तभी पहले चेतावनी स्वरूप हवाई फायरिंग की गई और फिर सीधे भीड़ को निशाना बनाकर गोलियां चलाई गईं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इस्राइली टैंकों और ड्रोन से भी फायरिंग हुई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
इसके अलावा रफा शहर के शकूश इलाके में भी ऐसी ही एक अन्य घटना सामने आई, जहां गोलीबारी में सात और लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक महिला भी शामिल थी। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
इस घटना को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “हम सिर्फ खाना मांग रहे थे, लेकिन जवाब में हमें गोलियां मिलीं।”
जीएचएफ ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि उसके किसी भी केंद्र पर गोलीबारी नहीं हुई और मौतें संभवतः भगदड़ या अफवाहों के कारण हुईं। वहीं, इस्राइली सेना का कहना है कि यदि भीड़ बहुत नजदीक आ जाए, तो वे चेतावनी स्वरूप गोलीबारी करते हैं। हालांकि, शनिवार की घटना को लेकर अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान नहीं आया है।
गौरतलब है कि जीएचएफ को अमेरिका और इस्राइल का समर्थन प्राप्त है और इसका उद्देश्य पारंपरिक राहत प्रणालियों की तुलना में अधिक सुरक्षित रूप से खाद्य सामग्री वितरित करना है। अमेरिका और इस्राइल का आरोप है कि हमास पारंपरिक वितरण प्रणालियों से राहत सामग्री हड़प लेता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने खारिज किया है।
7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुए इस्राइल-हमास संघर्ष के बाद से गाजा में अब तक 58,000 से अधिक फलस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे हैं। लगातार सैन्य अभियानों और विस्थापन के कारण गाजा में अब लगभग सभी नागरिक संकट से जूझ रहे हैं।







