छत्तीसगढ़ में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। हाल की दो घटनाओं—जांजगीर-चांपा में तालाब में डूबने से चार बच्चों की मौत और कांकेर जिले में बच्चों द्वारा नाला पार कर स्कूल जाने की मजबूरी—ने राज्य में बाल सुरक्षा की मौजूदा स्थिति की पोल खोल दी है। इन मामलों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इन घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि भले ही हादसों के लिए सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं मानी जाए, लेकिन बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। अदालत ने इस विषय में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर क्यों आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे सुरक्षित स्कूल पहुंच पाने में असमर्थ हैं। कांकेर जिले का मामला विशेष चिंता का विषय बना, जहां छात्र स्कूल पहुंचने के लिए उफनते नालों को पार करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी जान को खतरा है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे 29 जुलाई तक शपथपत्र के माध्यम से विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का यह दायित्व है कि वह सभी बच्चों को सुरक्षित और सुलभ शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करे।







