भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब देश की मतदाता सूची में कोई भी गैर-भारतीय नागरिक शामिल नहीं रहेगा। इसके लिए बिहार मॉडल को पूरे देश में लागू करने की तैयारी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि एक शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसी क्रम में बिहार में सफलतापूर्वक लागू किए गए मॉडल को देश के अन्य राज्यों में भी अपनाया जाएगा।
प्रमुख बातें:
बिहार में सफलता:
बिहार में अब तक 7.7 करोड़ फॉर्म भरे जा चुके हैं, जो कुल लक्ष्य का 97% से अधिक है। इसमें से लगभग 3.7 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन भी हो चुका है।
अगला चरण:
अगला नंबर पश्चिम बंगाल, कोलकाता और असम का है। इन क्षेत्रों में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ की संभावना अधिक बताई जा रही है।
दस्तावेजों की सूची:
पहचान के लिए 11 दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। इनमें से कुछ हैं:
1. जन्म प्रमाणपत्र
2. पासपोर्ट
3. स्कूल प्रमाणपत्र
4. ड्राइविंग लाइसेंस
5. बिजली/पानी/गैस बिल
(आधार और राशन कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में मान्यता नहीं)
निर्वाचन आयोग का कहना है कि देशभर में घर-घर जाकर मतदाता सूची की शुद्धता जांचने का विशेष अभियान चलाया जाएगा।
मतदाता सूची में फर्जी नामों और अवैध घुसपैठियों को हटाने के लिए यह पहल की जा रही है। यह प्रक्रिया 2026 तक बिहार सहित पूरे देश में पूरी की जाएगी, ताकि 2029 के आम चुनाव तक एक स्वच्छ और सत्यापित मतदाता सूची तैयार की जा सके।
भारत निर्वाचन आयोग की यह पहल लोकतंत्र को मजबूत करने और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब हर मतदाता की पहचान और नागरिकता की कड़ी जांच की जाएगी, जिससे फर्जी मतदान पर पूरी तरह रोक लग सके।







